रांची : हमारे अमर शहीदों ने अपने त्याग और बलिदानों से जिन उद्देश्यों को लेकर अलग झारखंड राज्य निर्माण के सपने संजोए थे, उनके सपने आज भी अधूरे हैं। शुक्रवार को ये बातें राजू महतो ने कहीं। वे रांची गोस्नर कंपाउंड स्थित थियोलॉजिकल हॉल में झारखंड आंदोलनकारियों के सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 23 साल बीत गए, लेकिन अब तक शहीदों के सपनों का झारखंड नहीं बन सका है। चाहे हेमंत सरकार हो, या पूर्व की भाजपा सरकार, सभी ने आदिवासी और मूलवासियों के भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है।
श्री महतो ने कहा कि भारत के मानचित्र पर झारखंड राज्य बनाकर स्वर्णिम इतिहास गढ़ने वाले झारखंड आंदोलनकारियों को ही आज हाशिए पर धकेल दिया गया है। चाहे पक्ष के हों या विपक्ष के, कोई भी इनकी सुध नहीं ले रहा है। आज आंदोलनकारी अपनी पहचान, मान-सम्मान तथा हक-हकूक के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
वहीं कार्यक्रम का संचालन करते हुए कयूम खान ने आंदोलनकारियों के आंदोलन की जानकारी दी, जबकि वरीय उपाध्यक्ष अश्विनी कुजूर ने ‘झारखंड आंदोलनकारी महासभा’ का गठन के पीछे के कारणों को बताते हुए कहा कि झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के नाम पर कुछ स्वार्थी तत्व उगाही कर रहे हैं।आंदोलनकारियों के हितों को दरकिनार कर सरकार की दलाली और रिश्वतखोरी कर रहे हैं। पैसे के बल पर जाली आंदोलनकारी बन रहे हैं और बनवा भी रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में झारखंड आंदोलनकारी महासभा का गठन वक्त की मांग है।
इस प्रस्ताव को सभी ने ध्वनि मत से पारित कर दिया। कार्यक्रम में धनबाद, बोकारो, पलामू, गढ़वा, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, खूंटी, गिरिडीह, कोडरमा, रामगढ़, हजारीबाग, चतरा, जामताड़ा, जमशेदपुर, चाईबासा सहित सभी जिलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में आजसू के केन्द्रीय महासचिव राजेन्द्र मेहता, उपाध्यक्ष हसन अंसारी, जदयू के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ आफताब जमील, डॉ वासवी किड़ो, झारखंड ओपेन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ त्रिवेणी नाथ साहू बतौर अतिथि मौजूद थे।






