दयानंद राय
रांची : हेमंत सोरेन के इस्तीफे के बाद चंपई सोरेन ने झारखंड के 12 वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है। उनके साथ आलमगीर आलम और सत्यानंद भोक्ता ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इस तरह 23 साल की अवधि में झारखंड को उसका 12वां मुख्यमंत्री मिल चुका है। शपथ ग्रहण के बाद चंपई सोरेन ने झारखंड मंत्रालय पहुंचकर पदभार भी संभाल लिया।
बिहार से अलग होकर जब झारखंड वर्ष 2000 में अलग राज्य बना था तो राज्य के पहले सीएम के रूप में बाबूलाल मरांडी ने कमान संभाली थी। उसके बाद से अब तक 11 मुख्यमंत्रियों ने झारखंड का नेतृत्व किया है।
आइए जानते हैं कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल कैसा था
15 नवंबर 2000 को झारखंड का अलग राज्य में गठन होने के बाद से 6 नेताओं ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया है। इनमें भाजपा नेता अर्जुन मुंडा और झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन तीन-तीन दफा मुख्यमंत्री बने हैं। शिबू सोरेन 10 दिन के लिए भी झारखंड के मुख्यमंत्री रहे थे। इसके अलावा गैर आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में भाजपा के रघुवर दास ने अपना कार्यकाल पूरा किया है।
इनके अलावा बाबूलाल मरांडी, मधु कोड़ा और हेमंत सोरेन भी मुख्यमंत्री रहे हैं। राज्य में पहले मुख्यमंत्री के रूप में बाबूलाल मरांडी ने 28 महीने तक सरकार चलायी। हालांकि वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। उन्हें सरकार में अंदरुनी कलह का सामना करना पड़ा और फिर उनके हाथों से राज्य की सत्ता की बागडोर छील ली गयी। उनका कार्यकाल 15 नवंबर 2000 से 17 मार्च 2003 तक रहा।
उनके बाद अर्जुन मुंडा राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री बने। वे तीन दफा राज्य के मुख्यमंत्री बने पर अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। पहली दफा 18 मार्च 2003 को उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली। उनका पहला कार्यकाल करीब दो साल, दूसरा करीब डेढ़ साल तथा तीसरा दो साल चार महीने से अधिक का रहा।
उनके बाद झारखंड आंदोलन से जुड़े शिबू सोरेन तीन दफा राज्य के मुख्यमंत्री बने पर वे भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। पहली दफा वे दो मार्च 2005 को झारखंड के मुख्यमंत्री बने पर बहुमत साबित न कर पाने के कारण दस दिनों में उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। शिबू सोरेन ने दूसरी दफा 27 अगस्त 2008 से 19 जनवरी 2009 तक मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। तीसरी दफा वे 30 नवंबर 2009 से एक जून 2010 तक झारखंड के मुख्यमंत्री रहे।
निर्दलीय मधु कोड़ा भी रहे मुख्यमंत्री
झारखंड के तत्कालीन निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा भी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने झारखंड के इतिहास में पांचवें मुख्यमंत्री के रूप में कुर्सी संभाली और करीब दो साल तक मुख्यमंत्री बने रहे। निर्दलीय विधायक रहते हुए मुख्यमंत्री बनने के कारण उनका नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में भी दर्ज है। उन्होंने 28 सितंबर 2006 से 27 अगस्त 2008 तक मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली।
रघुवर दास ही पूरा कर सके हैं कार्यकाल
झारखंड में वर्ष 2014 में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनायी और राज्य के पहले गैर आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में रघुवर दास ने रघुवर दास ने झारखंड की कमान संभाली। उन्होंने 28 दिसंबर 2014 को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और 28 दिसंबर 2019 तक राज्य के मुख्यमंत्री बने रहे। झारखंड के राजनीतिक इतिहास में वे पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है। 2019 के चुनाव में भाजपा ने राज्य में सत्ता गंवा दी।
हेमंत दो दफा सीएम रहे पर पूरा नहीं कर सके कार्यकाल
हेमंत सोरेन दो दफा राज्य के सीएम रहे पर वे कभी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। पहली बार 13 जुलाई 2013 से 28 दिसंबर 2014 तक वे झारखंड के मुख्यमंत्री रहे। दूसरी बार 29 दिसंबर 2019 से 31 जनवरी 2024 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उनका पहला कार्यकाल करीब एक साल चार महीने का रहा और दूसरा कार्यकाल चार साल एक महीने तक रहा।
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