Jharkhand law and order
रांची। पश्चिम बंगाल में ईडी और पुलिस का टकराव पूरे देश में सुर्खियों में है। इस बीच झारखंड में भी बंगाल वाला ही सीन देखने को मिल रहा है। यहां भी ईडी और पुलिस आमने-सामने हैं। ईडी अधिकारियों पर एक मामले में मारपीट का आरोप लगा है। इसकी जांच करने रांची पुलिस दल बल के साथ ईडी दफ्तर पहुंची है।
पुलिस ईडी अफसरों से पूछताछ कर रही है और बाहर पुलिस का गाड़ियों ने ईडी कार्यालय को घेर रखा है। वहीं, ईडी की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की प्रतिनियुक्ति भी वहां कर दी गई है। केंद्रीय बलों ने भी कार्यालय को पूरी तरह घेर रखा है। यह दृश्य पूरी तरह से पश्चिम बंगाल के वाकये की याद दिला रहा है। इधर बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर ईडी कार्यालय मामले को लेकर हेमंत सरकार पर जमकर बरसे। उन्होनें लिखा कि, रांची के एयरपोर्ट रोड स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय को @ranchipolice द्वारा घेरने की सूचना प्राप्त हो रही है। ईडी कार्यालय में मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM एवं पुलिस-प्रशासन से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामलों से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद हैं। आशंका है कि पुलिस कार्रवाई की आड़ में इन अहम साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट करने का प्रयास किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड में पहले भी ईडी के विरुद्ध झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए हैं तथा झामुमो-कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा ईडी पर हमले की कोशिशें भी हो चुकी हैं। ऐसी घटनाएं जांच एजेंसियों के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष कार्य में बाधा डालने का प्रयास है। हेमंत जी, कान खोलकर सुन लीजिए… झारखंड को बंगाल नहीं बनने देंगे।
मरांडी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि @PMOIndia @HMOIndia रांची स्थित ईडी कार्यालय पर केंद्रीय बलों की तैनाती कर सुरक्षा सुनिश्चित करें।
इस मामले से साफ है कि झारखंड में ईडी और राज्य पुलिस के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। पेयजल घोटाले की जांच के बीच, रांची पुलिस की टीम 15 जनवरी की सुबह दलबल के साथ एयरपोर्ट रोड स्थित ईडी कार्यालय पहुंची है। पुलिस यहां पेयजल घोटाले के अभियुक्त संतोष कुमार द्वारा ईडी अधिकारियों पर लगाए गए मारपीट के आरोपों की जांच और पूछताछ करने पहुंची है। इस दौरान ईडी कार्यालय के बाहर सुरक्षा संसाधनों के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों (CSF) के जवानों की तैनाती और अंदर पुलिस की मौजूदगी ने दोनों एजेंसियों के बीच टकराव के आसार पैदा कर दिये हैं।
राज्य में ईडी और पुलिस के बीच यह कानूनी और प्रशासनिक जंग नई नहीं है। इससे पहले अवैध खनन और साहिबगंज टोल टेंडर मामले में भी दोनों एजेंसियां आमने-सामने आ चुकी हैं। राज्य सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों की पूछताछ के लिए एक ‘SOP’ भी तैयार किया था, जिसे ईडी ने संसद द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन बताकर खारिज कर दिया था।
इसके अलावा, भूमि घोटाले की जांच के दौरान भी रिश्वत के आरोपों और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था, जहां ईडी ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। अब ताजा विवाद पेयजल घोटाले के मुख्य अभियुक्त संतोष कुमार की उस शिकायत से शुरू हुआ है, जिसमें उन्होंने ईडी अधिकारियों पर पूछताछ के दौरान मारपीट करने और साक्ष्य मिटाने का गंभीर आरोप लगाया है। एक तरफ ईडी घोटाले में ऊंची पहुंच रखने वालों की भूमिका खंगाल रही है, तो दूसरी तरफ पुलिस अब ईडी अधिकारियों की कार्यशैली की जांच कर रही है। एजेंसियों के बीच अधिकारों की यह खींचतान झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

