RIMS admission scam: रिम्स में बड़ा फर्जीवाड़ा: नकली एससी सर्टिफिकेट से मेडिकल में एडमिशन,छात्रा का नामांकन रद

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RIMS admission scam:

रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची में फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला लेने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सत्र 2025–26 की छात्रा काजल ने झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (JCECEB) के माध्यम से एससी श्रेणी में रैंक-01 प्राप्त कर एमबीबीएस सीट हासिल की थी। गिरिडीह उपायुक्त द्वारा उसके जाति प्रमाणपत्र को फर्जी घोषित करने के बाद रिम्स प्रबंधन ने सोमवार को उसका नामांकन रद्द कर दिया।

तीन नोटिस भेजने के बाद हुई कठोर कार्रवाई

रिम्स के निर्देश पर सभी छात्रों के प्रमाणपत्रों की डीसी कार्यालयों से जांच कराई जा रही थी। गिरिडीह डीसी से काजल का प्रमाणपत्र फर्जी होने की आधिकारिक पुष्टि मिली। इसके बाद रिम्स ने उसे लगातार तीन नोटिस भेजे, लेकिन छात्रा ने कोई जवाब नहीं दिया। विधि सलाह लेने के बाद संस्थान ने उसका नामांकन रद्द कर दिया, कक्षा में प्रवेश पर रोक लगा दी और रिम्स हॉस्टल खाली करने का आदेश भी जारी किया।

जालसाज गिरोह सक्रिय होने की आशंका

जांच में गंभीर अनियमितताओं के सामने आने से यह संदेह गहरा गया है कि रिम्स या जेसीईसीईबी प्रक्रिया में कहीं न कहीं जालसाजों का सक्रिय नेटवर्क काम कर रहा है। इससे पहले हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में भी इसी तरह का मामला सामने आ चुका है, जिससे पूरे प्रवेश तंत्र पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जाता है कि फर्जीवाड़ा अक्सर प्रमाणपत्र जमा करने के दौरान होता है, जबकि असली जांच कॉलेज स्तर पर सामने आती है।

एफआईआर पर असमंजस, छात्रा दे सकती है दोबारा नीट

रिम्स ने स्पष्ट किया है कि संस्थान अपनी ओर से एफआईआर दर्ज नहीं करेगा। अब यह कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन की तरफ से की जा सकती है। फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनाना और उपयोग करना कानूनन दंडनीय अपराध है।फिलहाल छात्रा पर नीट स्तर पर कोई स्थायी प्रतिबंध नहीं है, इसलिए वह सामान्य अभ्यर्थियों की तरह दोबारा परीक्षा दे सकती है।

हालांकि यदि भविष्य में आपराधिक मामला दर्ज होता है या NTA उसे धोखाधड़ी की श्रेणी में दंडित करता है, तब स्थायी रोक लग सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए NEET आवेदन में दर्ज श्रेणी और नामांकन के समय प्रस्तुत श्रेणी का मिलान अनिवार्य किया जाना चाहिए।

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