Rahul Singh:
रांची। झारखंड एटीएस सांगठनिक अपराध के खिलाफ मुहिम चला रही है। हाल ही गिरफ्तार किये गये गैंगस्टर मयंक सिंह उर्फ सुनील मीणा ने कई खुलासे किए है। मयंक सिंह ने अपराध जगत में चर्चित नाम राहुल सिंह का पूरा कच्चा चिट्ठा खोल कर रख दिया है। मयंक सिंह से जानकारी मिलने के बाद झारखंड एटीएस का अगला टारगेट अब राहुल सिंह ही है। झारखंड एटीएस की टीम लगातार उस पर निगरानी रखे हुए है।
विदेश में बैठकर क्राइम का नेटवर्क संभाल रहा राहुलः
मयंक सिंह ने एटीएस को बताया है कि राहुल सिंह विदेश में बैठकर अपराध का नेटवर्क संभाल रहा है। वह लातेहार जिला के चंदवा थाना अंतर्गत चेटर गांव का रहने वाला है। फिलहाल उसका लोकेशन अजरबैजान-जॉर्जिया के सीमावर्ती इलाके में है। इंटरनेट के माध्यम से झारखंड में अपराध का साम्राज्य चला रहा है।
राहुल सिंह अंग्रेजी नहीं जानताः
मयंक सिंह ने एटीएस को पूछताछ में बताया कि राहुल सिंह विदेश से अपराध का नेटवर्क चला रहा है। लेकिन, उसे ना तो उस देश की भाषा आती है, ना ही अंग्रेजी जानता है। अजरबैजान में पकड़ाने के बाद राहुल सिंह ने अपना लोकेशन बदल लिया था। फिलहाल अजरबैजान-जॉर्जिया की सीमा पर रह रहा है। आने वाले किसी भी दिन में राहुल सिंह पुलिस के हांथ लग सकता है।
आजाद सरकार और झांगुर गैंग की कमान राहुल के हाथों मेः
मयंक सिंह ने बताया कि राहुल सिंह आजाद सरकार और झांगुर गिरोह नाम से दो गैंग चला रहा है। कुछ माह पूर्व अमन साहू का इनकाउंटर में मारे जाने के बाद राहुल सिंह झारखंड में गिरोह को चला रहा है। अपराध जगत से आये पैसों को हवाला के माध्यम से विदेशी एकाउंट में ट्रांसफर करवाता है।
क्राइम का पैटर्न बदलाः
झारखंड में क्राइम का पैटर्न बदल गया है। पहले गैंगस्टर हो या अपराधी भारत के किसी दूसरे राज्य में छुपकर अपराध का नेटवर्क चलाते थे। लेकिन, डिजिटल दुनिया में सारा नेटवर्क विदेश से संचालित हो रहा है। गैंगस्टर मयंक सिंह ने यह खुलासा किया है। उसने अमन साहू गिरोह से जुड़े हर अपराधी का पूरा इतिहास भूगोल झारखंड एटीएस के सामने रख दिया है।
एटीएस राहुल को वापस लाने की जुगत मेः
झारखंड एटीएस एसपी ऋषव झा का कहना है कि मयंक सिंह ने पूछताछ में गिरोह के कई लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। एटीएस उसके बताये सूचनाओं पर काम कर रही है। राहुल सिंह को भी जल्द विदेश से भारत लाया जायेगा। इसके लिए राज्य से लेकर केंद्रीय एजेंसियां काम कर रही हैं। जरूरत पड़ी, तो इंटरपोल की भी मदद ली जायेगी।
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