Kairav Gandhi kidnapping case
जमशेदपुर। बीत दो दिनों से जमशेदपुर में कैरव गांधी का अपहरण मामला काफी चर्चा का विषय बनी हुई है। बता दे आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के उपाध्यक्ष देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि अपहर्ताओं ने पुलिस बोर्ड लगी स्कॉर्पियो का इस्तेमाल किया, जिस पर नंबर प्लेट जेएच 12ए 4499 लगी थी, जो असल में कोडरमा की बोलेरो की है। पुलिस ने बोलेरो के मालिक से पूछताछ की है और पता लगाया जा रहा है कि नंबर प्लेट का दुरुपयोग किस तरह हुआ।
रेकी और चुनी गई साजिश की जगह
पुलिस ने खुलासा किया कि अपहर्ताओं ने पहले कैरव गांधी के घर से फैक्ट्री तक के रास्ते और उनकी नियमित चाय दुकान की रेकी की। इसके बाद वारदात के लिए कदमा-सोनारी लिंक रोड चुना गया। एसआईटी टीम, जिसमें सरायकेला और पूर्वी सिंहभूम पुलिस शामिल हैं, लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
CCTV में कैद पूरी घटना
सीसीटीवी फुटेज में 13 जनवरी को दोपहर 12:52 बजे कैरव गांधी की कार का गुजरना दिखा। दो मिनट बाद वही गाड़ी तेज गति से एरोड्रम की ओर बढ़ती दिखाई दी, पीछे स्कॉर्पियो चल रही थी। कार बाद में कांदरबेड़ा में लावारिस हालत में मिली, जबकि स्कॉर्पियो चांडिल टोल प्लाजा से गुजरती देखी गई।
पांच करोड़ की रंगदारी और बिहार कनेक्शन
पुलिस को इंडोनेशिया नंबर से कॉल मिली, जिसमें कैरव की रिहाई के बदले 5 करोड़ रुपये की मांग की गई। अपहरण में बिहार के हाजीपुर और लालगंज गैंग के शामिल होने की संभावना पर भी जांच तेज कर दी गई है।
पहले भी हो चुका है ऐसा अपहरण
जमशेदपुर में इससे पहले 2005 में उद्यमी कृष्णा भालोटिया का अपहरण इसी तरह हुआ था। उस समय भी हाजीपुर का गिरोह शामिल था और मोबाइल लोकेशन के आधार पर 14 दिन बाद सुरक्षित बरामद किया गया था।इस खुलासे के साथ पुलिस की SIT अब बिहार और स्थानीय गिरोहों तक कनेक्शन का पता लगाने में जुटी है।

