Kairav Gandhi Case
जमशेदपुर। जमशेदपुर के युवा बिजनेसमैन कैरव गांधी के अपहरण की पूरी कहानी का खुलासा हो गया है। कैरव गांधी के अपहरण के लिए दिसंबर महीने से ही प्लानिंग की जा रही थी। इस पूरे अपहरण का मास्टरमाइंड इंडोनेशिया में बैठकर मॉनिटरिंग कर रहा था।
जिस स्कॉर्पियो से कैरव गांधी को उठाया गया था, उसे OLX पर खरीदा गया था। इस हाई प्रोफाइल अपहरण कांड की कहानी के तार कोई सामान्य किडनैपिंग नहीं; बल्कि पंजाब, झारखंड और बिहार तक फैले एक संगठित अपराध गिरोह की सुनियोजित साजिश थी।
सरदार जी है मास्टर मांड
इसका मास्टरमाइंड लुधियाना निवासी तेजिंदर पाल सिंह उर्फ सरदार जी है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी नालंदा के इस्लामपुर निवासी मो. इमरान उर्फ आमिरके ने पुलिस को दिए अपराध स्वीकारोक्ति बयान में पूरी साजिश का खुलासा किया। चौंकाने वाली बात यह है कि फिरौती के लिए 10 करोड़ रुपए की कॉल इंडोनेशिया से की गई थी।
कैरव गांधी अपहरण की कहानी
जमशेदपुर पहुंचने से पहले सरदारजी ने फोन कर चांडिल टोल प्लाजा के पास रुकने को कहा। वहां फॉर्च्यूनर (जेएच05डीएन-1231) से सरदारजी के चार आदमी पहुंचे। सभी पगड़ी वाले सरदार थे। उनमें तीन पुलिस की वर्दी में थे। वहां स्कॉर्पियो पर नंबर प्लेट (जेएच12ए-4499) लगाया गया। साथ ही पुलिस का स्टीकर और फॉर्च्यूनर पर लगी लाल-नीली फ्लैशर लाइट लगा दी।
हथियारबंद होकर सभी लिंक रोड पहुंचे
आमिरके ने बताया कि दो सरदार स्कॉर्पियो में बैठ गए। जमशेदपुर जाते समय मैंने एक कट्टा और दो गोली अपने पास रखी। एक कट्टा और दो गोली रमीज को दे दी। सुबह करीब 11.40 बजे हम सभी स्कॉर्पियो से कदमा-सोनारी लिंक रोड पहुंचे। 30 मिनट तक इलाके में घूमते रहे, ताकि किसी को शक न हो।
इसके बाद रमीज को अपहरण और भागने का पूरा प्लान समझाया। दोपहर करीब 12.15 बजे सफेद-काली क्रेटा कार आती दिखाई दी। पुलिस वर्दी वालों ने कार रुकवाई और हथियार के बल पर कैरव को स्कॉर्पियो में बैठा लिया।
बाद में हथियार झाड़ियों में फेंक दिया
आमिरके के अनुसार कैरव को लेकर वे सर्किट हाउस की ओर बढ़े और एक सरदार क्रेटा लेकर दूसरे रास्ते से फरार हो गया। उसने रास्ते में हथियार का डर दिखाकर केरल को चुप रखा। साईं मंदिर के पास उसने दोनों हथियार-गोलियां झाड़ियों में फेंक दी।
क्रेटा को जमशेदपुर में ही छोड़ दिया
अपहरण के बाद सुनसान जगह पर स्कॉर्पियो पर पुरानी प्लेट लगाई। कैरव को फॉर्च्यूनर में बैठाया गया। इस दौरान क्रेटा लेकर भागा सरदार भी ऑटो से वहां पहुंच गया। पुलिस से बचने के लिए कैरव को फॉर्च्यूनर से बिहार की ओर ले जाया गया, जबकि वह रमीज राजा और अन्य आरोपी स्कॉर्पियो से पुरुलिया के रास्ते राजगीर के लिए निकल गए। डोभी पुल पर कैरव को रूपेश पासवान की गाड़ी में शिफ्ट कर बोधगया ले जाया गया।
बोधगया से कैरव का वीडियो बनाकर फिरौती की डिमांड
बोधगया में कैरव का वीडियो बनाकर सरदारजी को भेजा गया। सरदारजी ने इंडोनेशिया से फोन कर परिजनों को फिरौती के लिए फोन किया और लगातार दबाव बनाता रहा। लेकिन, जैसे-जैसे पुलिस का शिकंजा कसता गया, गिरोह के सदस्य घबराने लगे। 26 जनवरी को सरदारजी ने फोन कर कहा- पुलिस बहुत करीब है। लड़के को कहीं और शिफ्ट करो।
पुलिस के दबाव में छोड़ा कैरव को
आमिरके उसी रात गुड्डू व रूपेश के साथ कैरव को लेकर बरही की ओर निकल पड़ा। रास्ते में पुलिस की हलचल दिखाई दी। पकड़े जाने के डर से वे कैरव को बरही के पास जंगल में छोड़ फरार हो गए।
बिहार आते रहते हैं सरदार जीः किडनैपिंग को अंजाम देनेवाले मो इमरान ने पुलिस को बताया कि उसकी सरदार जी से मुलाकात करीब दो साल पहले साद आलम के जरिए लुधियाना में हुई थी।
शुरुआत में काम के सिलसिले में फोन पर बातचीत होती थी, लेकिन धीरे-धीरे दोस्ती हो गई और आपसी समझदारी बढ़ती चली गई। करीब डेढ़ साल पहले वह सरदारजी के कहने पर सलमान खान के साथ उनके लुधियाना स्थित घर गया था। सरदारजी अक्सर राजगीर, बोधगया और पटना आते-जाते रहे। इन दौरों के दौरान वे सभी साथ में पार्टियां करते थे, जिसका सारा खर्च सरदारजी ही उठाते थे।
7 महीने पहले बनी अपहरण की योजना
करीब 7 महीने पहले साद आलम के जरिए पता चला कि सरदारजी जमशेदपुर के एक व्यक्ति के अपहरण और फिरौती की योजना बना रहे हैं। इसके बाद फोन पर बातचीत के दौरान सरदारजी ने मुझसे साफ तौर पर कहा- जमशेदपुर से एक व्यक्ति का अपहरण करना है। इसके लिए भरोसेमंद लोगों को जोड़कर तैयारी करनी होगी। उन्होंने भरोसा दिया- फिरौती की रकम सबके बीच बांटी जाएगी। फिरौती इतनी मिलेगी कि सबकी पुश्तें तर जाएगी। खर्च के लिए पहले ही एडवांस पैसा दिया जाएगा।
इस तरह तैयार हुआ गैंग
इसके बाद इमरान ने अपने गांव पहाड़ीतर के परिचित गुड्डू सिंह से संपर्क किया। गुड्डू सिंह ने अपने भरोसेमंद साथी उपेंद्र सिंह और अर्जुन सिंह को शामिल किया। बाद में उपेंद्र सिंह के माध्यम से बोधगया निवासी रुपेश पासवान को जोड़ा गया, जिसके यहां अपहृत व्यक्ति को रखने का प्लान था।
इसके बाद वह गुड्डू सिंह के साथ कई बार जमशेदपुर आया और बाहरी इलाकों में किराये के कमरे की तलाश की। इस दौरान पुलिस गतिविधियों पर नजर रखी और वैकल्पिक रास्ते तय किए।
गाड़ियों के लिए सरदार जी ने 4 लाख दिये
दिसंबर-2025 में सरदारजी ने छोटे हथियार-गोलियों की व्यवस्था, पुरानी स्कॉर्पियो खरीदने और 10-15 दिन तक बंधक रखने की पूरी तैयारी को कहा। साद आलम के जरिए गाड़ी खरीदने के लिए 4 लाख रुपए और गुड्डू सिंह के ग्रुप को देने के लिए 1.5 लाख रुपए का नया स्मार्टफोन और सिम दिया गया।
कुछ दिन बाद साद आलम और सरदारजी इंडोनेशिया चले गए। 2 जनवरी 2026 को ओएलएक्स पर पटना निवासी मोहन कुमार प्रसाद की सफेद रंग की स्कॉर्पियो (बीआर01पीबी-1062) देखी। 3 जनवरी और 5 जनवरी को पटना में मुलाकात के बाद 4 लाख में गाड़ी की डील हुई। एक लाख रुपए एडवांस देकर स्कॉर्पियो को हैंडओवर ले लिया।
फिर तैयारी को दिया गया अंतिम रूप
12 जनवरी को राजगीर में इमरान ने गुड्डू सिंह को 1.5 लाख रुपए देकर अपने लोगों को तैयार रहने को कहा। साथ ही स्मार्टफोन और सिम भी सौंपा। स्कॉर्पियो चलाने के लिए उसने अपने गांव के रमीज रजा को मोटी रकम का लालच देकर तैयार कर लिया। गुड्डू सिंह के थैले में दो कट्टा और चार जिंदा गोली लेकर आया और स्कॉर्पियो में रख दिया।
दोपहर करीब 3.30 बजे रमेश राजा और सरदारजी के एक आदमी के साथ स्कॉर्पियो से जमशेदपुर के लिए रवाना हुआ। रात करीब 11.30 बजे वे रांची से बाहर एक आलीशान होटल में रुके। 13 जनवरी को सुबह करीब 7.30 बजे होटल से जमशेदपुर के लिए निकले और किडनैपिंग को अंजाम दिया। इसके बाद की सारी कहानी तो सबको पता ही है।
