Child trafficking after Dhankatni
रांची। झारखंड के खुफिया विभाग ने बड़ा खुलासा किया है। विभाग की रिपोर्ट है कि राज्य में धनकटनी के बाद बच्चा चोरी की घटनाएं बढ़ गई हैं। झारखंड के बच्चों को चोरी कर महानगरों में बेचा जा रहा है। धनकटनी के बाद मानव तस्करी के साथ ही पलायन भी शुरू हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मानव तस्कर नाबालिगों को दिल्ली, पुणे, बेंगलुरु और पंजाब ले जा रहे हैं।
आठ जिलों में ज्यादा मामले
विशेष शाखा की ओर से मामले में राज्य के आठ जिले खूंटी, दुमका, सिमडेगा, गुमला, रांची, चाईबासा, लोहरदगा और पलामू के एसपी को सचेत किया गया है।
पहले भी धनकटनी के बाद इन्हीं जिलों से सबसे अधिक मानव तस्करी की घटनाएं सामने आती रही है। इसे देखते हुए रेलवे स्टेशनों व बस स्टैंड पर समूह में जाने वाले युवक युवतियों पर नजर बनाए रखने के लिए कहा गया है। ह्यूमन ट्रैफिकिंग रोकने व कार्रवाई के लिए राज्य के इन जिलों में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट यानी एएचटीयू भी बनाया गया है। इसके बाद भी मानव तस्कर निडर होकर नाबालिगों को अपना शिकार बना रहे है और पैसों का लालच देकर इनकी ट्रैफिकिंग कर रहे हैं।
500 बच्चे हर साल लापता हो रहे
एक आंकड़े के मुताबिक, झारखंड में हर साल करीब 500 बच्चे लापता हो रहे हैं। इनमें से 20 फीसदी नाबालिग का पता भी नहीं चल पाता।
रोजगार की कमी मुख्य वजह
मानव तस्करी की मुख्य वजह राज्य में रोजगार और काम की कमी है। धनकटनी पूरा होने के बाद, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम हो जाते हैं। इन क्षेत्रों के युवक-युवतियां सबसे अधिक तस्करी के शिकार होते है। इन्हें अच्छी नौकरी का लालच देकर तस्कर अपने साथ दूसरे राज्यों में ले जाते हैं और बेच देते हैं। इसमें प्लेसमेंट एजेंसियां और दलाल भी शामिल हैं।
युवतियों का होता है यौन शोषण
शिकार होने वालों में सबसे अधिक आदिवासी महिलाएं, लड़कियां और नाबालिग बच्चे शामिल हैं। इन्हें घरेलू कामगार, निर्माण श्रमिक या यौन शोषण के लिए तस्करी किया जाता है।
धनकटनी खत्म होने के बाद बढ़ते हैं मामले
धनकटनी के बाद झारखंड में मानव तस्करी के मामले ज्यादा बढ़ जाते हैं। जून से नवंबर तक झारखंड में धान की रोपाई से लेकर कटाई तक रोजगार की कमी नहीं रहती। इसके बाद 16 से 18 वर्ष के युवाओं को दलाल या उनके जानने वाले ही पैसा का लालच देकर झांसे में लेते है। कुछ को ईंट भट्टों में तो कुछ को महानगरों में घरेलू काम के लिए एजेंसियों को बेच देते हैं। इन्हें 10 हजार से लेकर 25 हजार तक में बेचा जाता है।
