Jharkhand bus permit policy:
रांची। झारखंड में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लंबे समय से बस संचालकों के लिए चुनौती बनी बस परमिट की प्रक्रिया को अब आसान और पारदर्शी बनाने की तैयारी की जा रही है। परिवहन विभाग इस दिशा में कई प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों पर विचार कर रहा है, जिससे बस ऑपरेटरों को राहत मिलने और यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है। राज्य में कई रूटों पर बसों की जरूरत होने के बावजूद नए परमिट जारी नहीं हो पा रहे हैं।
विभाग के अनुसार, रूट निर्धारण में देरी, परमिट नीति की सीमाएं और लंबित प्रशासनिक प्रक्रियाएं इसकी मुख्य वजह रही हैं। इसका असर यह हुआ कि कई इलाकों में बस सेवाएं पर्याप्त नहीं हैं, जबकि कुछ बसें परमिट के अभाव में संचालन शुरू नहीं कर पा रही हैं।
परमिट प्रक्रिया में आ रही प्रमुख दिक्कतें
झारखंड में बस परमिट लेने के दौरान तकनीकी और प्रशासनिक दोनों तरह की समस्याएं सामने आती रही हैं। ऑनलाइन आवेदन के दौरान पोर्टल पर तकनीकी खराबी के कारण आवेदन प्रक्रिया अटक जाती है। आरसी, इंश्योरेंस, फिटनेस और प्रदूषण प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज अपलोड करने में भी परेशानी होती है।
इसके अलावा, ग्रामीण और नए रूटों के लिए परमिट स्वीकृति में लंबा समय लग जाता है। कई बस ऑपरेटरों को लाभदायक रूट नहीं मिल पाते, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोकल परिवहन संचालकों के साथ तालमेल की कमी भी एक समस्या बन जाती है। सरकारी योजनाओं के बावजूद बस स्टैंड और रूट से जुड़ी स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने से भी परेशानी बढ़ती है।
RTA बैठक नहीं होने से अटके फैसले
बताया जा रहा है कि लंबे समय से RTA स्तर की बैठकों का नियमित आयोजन नहीं होने के कारण कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं। इसी वजह से परमिट से जुड़े कई निर्णय समय पर नहीं हो पाए।
राजीव रंजन की नियुक्ति से उम्मीदें
हाल ही में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव रंजन को परिवहन विभाग का सचिव बनाया गया है। प्रशासनिक अनुभव और विभागीय समन्वय में उनकी दक्षता को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि बस परमिट से जुड़ी लंबित समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया तेज होगी। विभागीय बैठकों के साथ साथ RTA की बैठक बुलाई जा सकती हैं । इतना ही नहीं परमिट प्रक्रिया को डिजिटल रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं।
यदि प्रस्तावित सुधार लागू होते हैं, तो आने वाले समय में झारखंड में बस परमिट लेना आसान होगा और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में भी सुधार देखने को मिलेगा।






