Jharkhand Assembly session: झारखंड विधानसभा सत्र का तीसरा दिन आज, पेश होगा तृतीय अनुपूरक बजट

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Jharkhand Assembly session

रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का तीसरा दिन शुक्रवार को शुरू हुआ। आज वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर सदन में तृतीय अनुपूरक बजट पेश करेंगे। सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण पर वाद-विवाद से हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अपने-अपने मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। बहस के बाद सरकार की ओर से जवाब भी सदन में रखा जाएगा।

JPSC में उम्र सीमा पर हो सकता है बदलाव

संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने संकेत दिए हैं कि Jharkhand Public Service Commission (जेपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि हाल की कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी और मुख्यमंत्री Hemant Soren भी इसे गंभीरता से देख रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे अभ्यर्थी जो हाईकोर्ट नहीं गए थे, उन्हें भी इस संभावित छूट के दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है।

यह जवाब मंत्री ने कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव के सवाल पर दिया। प्रदीप यादव ने शून्यकाल में कटऑफ वर्ष को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था। विधायक अमित कुमार महतो और जयराम महतो ने भी परीक्षा में देरी और कटऑफ वर्ष को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि राज्य में अब तक अपेक्षाकृत कम बार सिविल सेवा परीक्षा आयोजित हुई है, जिससे अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ा है।

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर तीखी नोकझोंक

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि एसीबी हाई प्रोफाइल मामलों में समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं कर पा रही है। उन्होंने 2022 के कथित शराब घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि गिरफ्तारी में देरी और चार्जशीट दाखिल न होने से आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल गई। मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि सूचना आयुक्त और लोकायुक्त के पद लंबे समय से खाली हैं। साथ ही कोयला और बालू तस्करी तथा धान खरीद लक्ष्य का केवल 40% पूरा होने जैसे मुद्दे भी उठाए।

केंद्र सरकार पर सत्तापक्ष का निशाना

सत्ता पक्ष के विधायक हेमलाल मुर्मू ने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव रखते हुए केंद्र सरकार पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य करने और मनरेगा का नाम बदलने जैसे मुद्दों पर केंद्र का हस्तक्षेप उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने हर साल करोड़ों युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन वह पूरा नहीं हुआ। इसके विपरीत राज्य सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।

डीजीपी नियुक्ति और आदिवासी मुद्दे पर बहस

विपक्ष ने राज्य में डीजीपी नियुक्ति को लेकर भी सरकार को घेरा। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति नियमों के विरुद्ध की गई है। इस संदर्भ में उन्होंने Supreme Court of India द्वारा पहले दिए गए निर्देशों का हवाला दिया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जवाब देते हुए कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए सदन में इस पर चर्चा करना उचित नहीं है। मरांडी ने आदिवासी हितों और जमीनी संघर्षों का मुद्दा उठाते हुए जसीडीह क्षेत्र में वर्षों से रह रहे लोगों को हटाए जाने के मामले में सरकार की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार उचित कदम नहीं उठाती है तो प्रभावित लोग खुद आवाज बुलंद करेंगे।

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