Jharkhand payment crisis
रांची। झारखंड में वित्तीय संकट और फंड की कमी की बात लगातार चर्चा में हैं। इस बीच विकास आयुक्त की समीक्षा बैठक में हुए खुलासे से इस चर्चा को बल मिला है। बैठक में कुछ विभागों ने फंड की कमी केकारण पेमेंट फंसने की बात कही है।
खुलासा हुआ कि राज्य के तीन महत्वपूर्ण विभाग ग्रामीण कार्य, पेयजल एवं स्वच्छता और ग्रामीण विकास में पहले से हो चुके कार्यों का करीब 11,700 करोड़ रुपए का पेमेंट लंबित है। यह पेमेंट कैसे हो, यह बड़ी चुनौती बनी हुई है। विभाग में इसे लेकर मंथन जारी है।
विभागीय सचिवों ने जताई चिंताः
विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह के साथ हुई समीक्षा बैठक में विभागीय सचिवों ने इसे लेकर चिंता जताई है। बैठक में विकास आयुक्त ने योजना मद के तहत संचालित योजनाओं की विभागवार समीक्षा भी की। इसी दौरान सचिवों ने बताया कि पूर्व में कराए गए कार्यों का भुगतान करना मुश्किल हो गया है।
योजनाएं बाधितः
ग्रामीण कार्य और ग्रामीण विकास विभाग के सचिव के. श्रीनिवासन ने बताया कि बजट और फंड की कमी के कारण चालू वित्तीय वर्ष में अब तक नए पुल-पुलिया और ग्रामीण सड़कों का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। पिछले वर्षों में कराए गए कार्यों के भुगतान लंबित होने से यह स्थिति बनी है।
क्यों बनी ऐसी स्थितिः
अधिकारियों ने बताया कि यह स्थिति इसलिए बनी, क्योंकि पिछले दो वर्षों में विभाग ने तय बजट से कई गुना अधिक काम करा लिया। सामान्य तौर पर उपलब्ध फंड से 25-30% अधिक काम कराया जा सकता है, लेकिन इससे कहीं ज्यादा काम होने से अब भारी भुगतान मुश्किल हो गया है। इसका सीधा असर यह पड़ा है कि वर्ष 2025–26 में नए पुल-पुलिया और ग्रामीण सड़कों के निर्माण की शुरुआत नहीं हो पा रही है।
अनुपूरक बजट में नहीं मिली राशिः
द्वितीय अनुपूरक बजट में ग्रामीण कार्य विभाग ने पुराने बिलों के भुगतान के लिए 3000 करोड़ रुपए की मांग की थी। हालांकि वित्त विभाग ने केवल 800 करोड़ रुपए का प्रावधान किया। इसमें 300 करोड़ रुपए नई सड़कों के लिए, 100 करोड़ रुपए नए पुल-पुलिया के लिए और शेष 400 करोड़ रुपए लायबिलिटी भुगतान के लिए रखे गए हैं। इसके बावजूद अभी संकट बना हुआ है।
किस विभाग में कितना बकायाः
- ग्रामीण कार्य 8000 करोड़
- पेयजल स्वच्छता 2500 करोड़
- ग्रामीण विकास 1200 करोड़
खजाना खाली नहीः वित्त मंत्री
इधर, राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य का खजाना खाली नहीं है। कर्मचारी का वेतन बकाया नहीं है। चालू वित्तीय वर्ष में राज्य को करीब 1.25 लाख करोड़ रुपए के संसाधन उपलब्ध होने हैं। आय-व्यय दोनों समानांतर चल रहे हैं। वित्तीय वर्ष के अंत तक राज्य अपने आंतरिक संसाधनों की 85 से 90 प्रतिशत तक वसूली पूरी कर लेगा। केंद्रीय करों में हिस्सेदारी और ग्रांट-इन-एड के रूप में करीब 30 हजार करोड़ रुपए मिलने का भरोसा है। मंत्री ने कहा कि भुगतान क्यों नहीं हो रहा, देखना होगा।







