JEPC का बड़ा फैसला: अब झारखंड में अनाथ बेटियों को मिलेगा नए आवासीय स्कूल

Anjali Kumari
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JEPC decision Jharkhand

रांची। झारखंड में शिक्षा से वंचित और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग की बच्चियों के लिए झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य में अब 6 से 10 वर्ष की अनाथ और एकल अभिभावक की बेटियों के लिए नए नेताजी सुभाषचंद्र बोस आवासीय (अनाथ) विद्यालय खोले जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी बच्चियों को सुरक्षित आवासीय वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

कहां कहां बनेंगे बच्चों ये स्कूल?

JEPC ने इस दिशा में तैयारी शुरू करते हुए राज्य के सभी जिलों से ऐसी बच्चियों की सूची मांगी है, जो इन विद्यालयों में नामांकन के योग्य हों। फिलहाल राज्य में केवल रांची और पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक-एक आवासीय विद्यालय बालिकाओं के लिए संचालित हैं। जिलों से प्राप्त सूची और आवश्यकता के आधार पर अन्य जिलों में भी इन विद्यालयों का संचालन शुरू किया जाएगा।

यह निर्णय लोकसभा सचिवालय की स्टैंडिंग कमेटी ऑन लेबर, टेक्सटाइल एंड स्किल डेवलपमेंट के सुझाव के आधार पर लिया गया है। JEPC की ओर से बताया गया कि नए आवासीय विद्यालय खोलने का प्रस्ताव आगामी बजट में भारत सरकार को भेजा जाएगा, ताकि इसके लिए आवश्यक वित्तीय स्वीकृति मिल सके।इन आवासीय विद्यालयों में नामांकन के दौरान अत्यधिक वंचित और कठिन परिस्थितियों में रहने वाली बालिकाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। कुल 11 श्रेणियों की बालिकाओं को इस योजना के अंतर्गत प्राथमिकता सूची में रखा गया है, जिससे वास्तविक जरूरतमंद बच्चियों तक इसका लाभ पहुंच सके।

JEPC के निदेशक शशि रंजन ने क्या निर्देश दिया?

JEPC के निदेशक शशि रंजन ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि वे 30 जनवरी तक योग्य बच्चियों की विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। इस रिपोर्ट के लिए शिशु पंजी के अद्यतन आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा। रिपोर्ट में छात्रा का नाम, माता-पिता का नाम, पूरा पता, प्रखंड, मोबाइल नंबर और संबंधित श्रेणी की जानकारी अनिवार्य रूप से शामिल होगी।

JEPC की यह पहल राज्य में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे अनाथ और बेसहारा बच्चियों को शिक्षा के साथ बेहतर भविष्य का अवसर मिल सकेगा।

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