Sanjeev Singh murder case:
जमशेदपुर। चर्चित जमीन कारोबारी संजीव सिंह हत्याकांड में आखिरकार 10 साल बाद अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। जमशेदपुर एडीजे-5 मंजू कुमारी की अदालत ने इस सनसनीखेज मामले में झामुमो ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष दुबाराज नाग और मृतक के चचेरे भाई जितेंद्र सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले को लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे संजीव सिंह के परिजनों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
जुर्माना और आर्म्स एक्ट में अतिरिक्त सजा
अदालत ने दोनों दोषियों पर हत्या के मामले में 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके साथ ही आर्म्स एक्ट के तहत तीन साल की अतिरिक्त सजा और 10-10 हजार रुपये का अलग से जुर्माना सुनाया गया है। हालांकि, इस मामले में नामजद अन्य छह आरोपी—मंगल टुडू, चित्रो सरदार, मिथुन चक्रवर्ती, डोमिनिक सेमरंग, मोहन कच्छप और सरफुद्दीन अंसारी—को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
2016 में हुई थी दिनदहाड़े हत्या
गौरतलब है कि संजीव सिंह की हत्या 12 मई 2016 को की गई थी। वह अपने घर सरजामदा लौट रहे थे, तभी सुबह करीब 10:45 बजे गोविंदपुर थाना क्षेत्र के जोजोबेड़ा रेलवे फाटक के पास अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। मौके पर ही संजीव सिंह की मौत हो गई थी। इस वारदात से पूरे जमशेदपुर में दहशत फैल गई थी और मामला काफी सुर्खियों में रहा।
राजनीतिक रंजिश और जमीन विवाद बना कारण
पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या के पीछे राजनीतिक रंजिश और जमीन कारोबार से जुड़ा विवाद मुख्य कारण था। जांच एजेंसियों ने दुबाराज नाग को इस साजिश का मास्टरमाइंड बताया था। वहीं, मृतक के चचेरे भाई जितेंद्र सिंह पर आरोप था कि उसने अपने ही रिश्तेदार की गतिविधियों की जानकारी देकर अपराधियों की मदद की।
न्याय की जीत बताया गया फैसला
लंबी सुनवाई और गवाहों के बयान के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। 10 साल बाद आए इस फैसले को संजीव सिंह के परिवार के साथ-साथ आम लोगों ने न्याय की बड़ी जीत बताया है।











