Jairam Mahto: विधानसभा में गूंजी प्रवासी मजदूरों की पीड़ा: जयराम बोले, “सरकार की कथनी-करनी में क्यों है अंतर?

Anjali Kumari
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Jairam Mahto

रांची। झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठे। बगोदर विधायक जयराम महतो ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि राज्य के प्रवासी मजदूर लगातार संकटों से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकार संवेदनहीन रवैया अपना रही है। उन्होंने बताया कि बगोदर के पांच मजदूर अभी भी नाइजर के आतंकियों के कब्जे में बंधक हैं, और उनके परिवार बेसहारा स्थिति में जीवन काट रहे हैं।

जयराम ने सदन में यह कहा

जयराम ने सदन में कहा कि इन परिवारों के पास न राशन है न राहत, और वे अब विधायकों से गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री से मिलाया जाए। उन्होंने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।विधायक ने यह भी खुलासा किया कि झारखंड के विजय कुमार का शव सऊदी अरब में 50 दिनों से बिना किसी प्रक्रिया के पड़ा हुआ है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जयराम ने कहा कि झारखंड की अर्थव्यवस्था में प्रवासी मजदूरों का बड़ा योगदान है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

जयराम ने आरोप लगाया

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की योजनाएं कागजों पर तो मजबूत दिखती हैं, लेकिन जमीन पर उनमें गंभीर कमी नजर आती है। गढ़वा, पलामू, चतरा जैसे जिलों से रोज मजदूरों के संकट से जुड़े आवेदन आते हैं, लेकिन कई विभाग समय पर जवाब तक नहीं देते। जयराम ने ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र के चार-पांच प्रखंडों में प्रवासी मजदूरों की संख्या 70–75 प्रतिशत है और वे हर सत्र में उनकी समस्याएं उठाते रहे हैं। अपनी 180 किलोमीटर की हालिया पदयात्रा का जिक्र करते हुए जयराम ने कहा कि जनता का भारी समर्थन इस बात का संकेत है कि लोगों में सरकार के कामकाज को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।

जयराम ने अंत में कहा कि वे प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, पलायन रोकने और विदेशों में फंसे मजदूरों की सुरक्षित वापसी जैसे मुद्दों को आगे भी सदन में जोरदार तरीके से उठाते रहेंगे तथा सरकार को संवेदनशीलता के साथ तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

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