संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना हर भारतवासी का कर्तव्य : डॉ विनय भरत

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रांची : जदयू के प्रदेश प्रभारी डॉ विनय भरत ने कहा है कि न पुराण, न कुरान, सबसे बड़ा संविधान”। श्री भरत ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना संविधान की गाइडिंग प्रिंसिपल है। जो सिर्फ प्रस्तावना के  हम ,भारत के लोग को समझ ले , उसके हाथ में देश को एक सूत्र में बांधने की कुंजी मिल जाती है। वे संविधान दिवस की पूर्व संध्या पर बापू वाटिका, मोरहाबादी में उपस्थित छात्र जदयू की विचार गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि आज जब देश संप्रदायिकता समेत कई समस्याओं से जूझ रहा है संविधान तथा संवैधानिक मूल्यों की अहमियत और भी बढ़ जाती है। हमारे देश के कर्णधारों ने बहुत सोच-विचारकर देश के संविधान को बनाया और अंगीकृत किया। इसलिए हर भारतवासी का यह कर्तव्य है कि वो संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए तत्पर रहे।

इस मौके पर छात्र जदयू के प्रदेश अध्यक्ष रंजन कुमार ने कहा कि “संविधान से ही भारत देश है। कार्यक्रम में उन्होंने विभिन्न मौलिक आधिकारों और मौलिक कर्तव्यों  के बारे में विस्तार से बताया। अनुच्छेद 21 के  “जीने का अधिकार” सभी मौलिक अधिकारों में आधार स्तम्भ है ,वहीं अनुच्छेद 51 (अ) के तहत देश में वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा करना मौलिक कर्तव्यों में सबसे बड़ा कर्तव्य है।”

प्रदेश प्रवक्ता डॉ मुकेश यादव ने कहा कि  संविधान ने ही हमें बोलने का अधिकार दिया है’। कार्यक्रम में मुख्य रूप से रांची जिला अध्यक्ष शमी अहमद, डीएसपीएमयू अध्यक्षा तन्वी बरदियार, प्रिया कुमारी ,विकास कुमार सिंह, अनीश कुमार, अनुज कुमार,दीपशिखा बारला,अनिमा लकड़ा,शिवानी कुमारी, स्वेता सुमन उरांव, अनामिका सोरेन, पूजा कुमारी,अमित कुमार टोप्पो, शुभम कच्छप,अभिषेक उरांव, मंथन रुंडा, आदि उपस्थित थे और सभी ने अपने विचार साझा किया। कार्यक्रम का अंत संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक पाठ से हुआ।

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