Insurance Company to pay Compensation: बीमा कंपनी को झटका, मृतका के परिजनों को 45 दिन में मुआवजा देने का आदेश

Abhishek Singh
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Insurance Company to pay Compensation:

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले एक यात्री के मामले में अहम आदेश पारित किया है। अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज करते हुए मृतका के परिजनों को 45 दिन में मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह 2009 में सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाली महिला के परिजनों को निर्धारित मुआवजा राशि 2.54 लाख रुपए का भुगतान 9 प्रतिशत ब्याज के साथ करे।

यह है मामलाः

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19 मई 2009 को लालपुर चौक पर यात्रियों से भरी एक कमांडर जीप (बीआर 7पी-1013) पलट गई थी। हादसे में अहमदी बेगम की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उनके पति ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मुआवजे का दावा दायर किया था। जमशेदपुर के मोटर दुर्घटना दावा दाखिल न्यायाधिकरण ने 2014 में मृतका के पति को 2.54 लाख रुपए मुआवजा और 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया था।

बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया थाः

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न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने हाईकोर्ट में अपील की। कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि वाहन चालक के पास सिर्फ हल्के वाहन (एलएमवी) चलाने का लाइसेंस था, जबकि टैक्सी चलाने के लिए सार्वजनिक वाहन (पीएसवी) बैज जरूरी था। सुनवाई के दौरान अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 7500 किलो से कम वजनी वाहनों को चलाने के लिए अलग से पीएसवी बैज की जरूरत नहीं है, अगर चालक के पास एलएमवी का लाइसेंस है।

कोर्ट ने यह भी पाया कि बीमा कंपनी परमिट न होने का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुआवजा राशि बढ़ाई नहीं जा सकती, क्योंकि यह अपील कंपनी ने की थी, न कि पीड़ित पक्ष ने। लिहाजा बीमा कंपनी को मूल मुआवजा ही अदा करना होगा। अदालत ने कंपनी को आदेश दिया कि 45 दिन के भीतर राशि ट्रिब्यूनल में जमा करें, ताकि पीड़ित परिवार को भुगतान किया जा सके।

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