Industrial corridor:
रांची। बोकारो अब अमृतसर-कोलकाता फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ेगा। बोकारो में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) 746 एकड़ जमीन देने को तैयार है। इसके लिए सेल और राज्य सरकार के बीच सैद्धांतिक सहमति बन गई है। सेल ने इस जमीन के लिए राज्य सरकार को 1444 करोड़ रुपए का प्रस्ताव दिया है। जबकि सरकार इसे कम कराने की कोशिश में है।
राज्य सरकार कर रही कीमत कम कराने की कोशिशः
इस पर भू-अर्जन निदेशक की अध्यक्षता में बनी कमेटी, सेल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के बीच बैठक हो चुकी है। जिस जमीन की बात हुई है, कृषि भूमि दर के आधार पर इसकी कीमत 238 करोड़ रुपए होती है। वहीं औद्योगिक भूमि दर पर 357 करोड़ और व्यावसायिक दर पर कीमत 714 करोड़ रुपए होती है। राज्य सरकार इसे आधार बनाते हुए जमीन की कीमत कम कराने के प्रयास में है।
अमृतसर-कोलकाता फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ेगाः
अमृतसर-कोलकाता फ्रेट कॉरिडोर के तहत झारखंड में एक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की कोशिश चल रही है। तीन साल पहले बोकारो को इसके लिए उपयुक्त मानते हुए 1000 एकड़ में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने के लिए राज्य सरकार ने सेल प्रबंधन को जमीन उपलब्ध कराने को कहा था। जीटी रोड के राजगंज से इस क्षेत्र की दूरी करीब 45 किलोमीटर है। लेकिन, सेल प्रबंधन तैयार नहीं हुआ। सेल ने गढ़वा के भवनाथपुर में सेल की 1000 एकड़ जमीन पर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने का विकल्प सुझाया था।
बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन ने कहा था कि बोकारो स्टील सिटी परिसर में आधुनिकीकरण एवं विस्तारीकरण का प्रस्ताव विभागीय स्तर पर विचाराधीन है। इसके बाद सेल की बोकारो विंग ने बोकारो प्लांट क्षेत्र के अलावा भवनाथपुर में सेल माइनिंग की खाली पड़ी 1180 एकड़ में से 1000 एकड़ जमीन पर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने का विकल्प सुझाया था। लेकिन, उस जमीन के नीचे कोयला और अन्य खनिज होने और जमीन उबड़-खाबड़ होने के कारण यह उपयुक्त नहीं लगा। इसके बाद बोकारो में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए 746 एकड़ जमीन देने की बात हुई।
बरही में ग्रामीणों ने किया विरोधः
वर्ष 2017 में तय हुआ था कि बरही में कोलकाता-अमृतसर कॉरिडोर का कलस्टर बनेगा। तत्कालीन मुख्य सचिव ने उद्योग विभाग की टीम के साथ इंडस्ट्रियल कॉरिडोर निर्माण के लिए भूमि का निरीक्षण भी किया था। केन्द्र सरकार की इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्लान के तहत बरही के देवचंदा समेत कजरा, केदारुत, डुमरडीह, कटिऔन, खैरोन, और खोड़ाहार गांव मिलकर 25 सौ एकड़ जमीन में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की बात थी। बाद में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए चिह्नित स्थल देवचंदा गांव के अधिकांश लोगों ने इसका यह कहकर विरोध कर दिया था कि जमीन चली जाएगी तो वे खाएंगे क्या। उनकी जमीन में तीन फसल होती है। इसके बाद इस दिशा में आगे कुछ नहीं हो सका।
कैसे होगा कामः
क्षेत्र को एकीकृत क्लस्टर (आईएमसी) में 40 प्रतिशत क्षेत्र विनिर्माण और प्रसंस्करण गतिविधियों के लिए स्थायी रूप से निर्धारित किया जाएगा। एडीकेआईसी सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) दृष्टिकोण और गैर-पीपीपी दृष्टिकोण दोनों का उपयोग करेगा। गैर-पीपीपी योग्य ट्रंक बुनियादी ढांचे को विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) या कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा विकसित किया जाएगा, जो अनुदान सहायता के माध्यम से आईएमसी की स्थापना के कार्य होंगे।
केन्द्र सरकार की योजना के अनुसार अमृतसर से कोलकाता तक झारखंड समेत सात राज्यों में इंडस्ट्रियल कॉरीडोर बनाया जाना है। उसमें बरही भी शामिल है। इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में छोटे- बड़े इंटिग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग कलस्टर बनाए जाएंगे, जिसमें देश भर के उद्यमी अपना उद्योग लगाएंगे। इस परियोजना का उद्देश्य कॉरिडोर के मार्ग के साथ राज्यों में बुनियादी ढांचे और उद्योग का विस्तार करना है। एडीकेआईसी का विकास फ्रेट कॉरिडोर के दोनों ओर 150-200 किमी के दायरे में चरणबद्ध तरीके से किया जाना है।
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