रांची : भारत लोकतंत्र की जननी है और यहीं सबसे पहले लोकतंत्र का उदय हुआ। रविवार को ये बातें डॉ विनय भरत ने कहीं। वे डोरंडा कॉलेज के बीएड विभाग में आयोजित वेबिनार में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। वेबिनार का आयोजन संविधान दिवस के मौके पर किया गया था और इसका विषय भारत: लोकतंत्र की जननी था। कार्यक्रम का संचालन विभाग की प्रशिक्षु शिक्षिका रितिका श्रीवास्तव ने किया।
कार्यक्रम में डॉ विनय भरत ने संविधान सभा के सदस्य के रूप में झारखंड के सपूत जयपाल सिंह मुण्डा, सिंहभूम जिले के देवेन्द्र नाथ सामंत, हजारीबाग के बाबू रामनारायण सिंह, बिनोदानंद झा संयुक्त बिहार के मुख्यमंत्री, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथी रहे अमनीय घोष, कृष्ण बल्लभ सहाय, लोहरदगा की बेनिफास लकड़ा साथ ही उन पंद्रह महिला सदस्यों को भी स्मरण किया जिसमें दुर्गा देशमुख, रेणुका, सरोजनी नायडू का नाम शामिल है। उन्होंने कहा की फन्डामेंटल राईटस जब 1976 में फन्डामेंटल ड्यूटीज पार्ट 4(A) हुआ जिसमें संविधान का पालन, राष्ट्र ध्वज का सम्मान, राष्ट्र गान का सम्मान, स्वतंत्रता के लिये राष्ट्रीय आदर्शों को हृदय में संजोना, प्रकृति पर्व नदी, पर्वत, जंगल, कीट पतंग पूरे वातावरण में व्याप्त प्रकृति का संरक्षण के मर्म को विस्तार से बतलाया।
आगत अतिथियों का स्वागत विभाग की प्रशिक्षु शिक्षिका रोशनी नाज ने किया। वहीं, शतरूपा, कुमुद और श्वेता ने संविधान की प्रस्तावना क्रमशः हिन्दी अंग्रेजी, संस्कृत और उर्दु में पढ़ा और मुख्य विंदुओं को बतलाया। अमर ने इस अवसर पर प्रश्नोत्तरी का संचालन किया।बेबिनार के संयोजक विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ ओम प्रकाश ने कहा कि संविधान की शक्ति का परिणाम विश्व में गुंजे हमारी भारती है।। वेबिनार की मुख्य अतिथि उप निदेशक सी वी एस सह ओ एस डी वाईस चांसलर रांची विश्वविद्यालय डॉ स्मृति सिंह ने सभी को शुभकामनाएं प्रेषित की। इस अवसर सभी प्रशिक्षुओ सहित प्रखर शिक्षाविद डॉ वासुदेव प्रसाद, डॉ आरती शर्मा, डॉ अनिल उरांव, डॉ कुसुम, इंद्रानी आदि जुड़े रहे। बेविनार को सफल बनाने में प्रशिक्षु इंदिरा, रोशन सिंह सहित सभी प्रशिक्षुओ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। धन्यवाद ज्ञापन प्रशिक्षु शिक्षक संजीत ने किया तथा राष्ट्र गान शिवानी ने गाया।







