झारखंड में लोकसभा की सीटों पर इंडिया गठबंधन के घटक दलों का डांडिया

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रांची : झारखंड में लोकसभा की सीटों पर इंडिया गठबंधन के घटक दलों का डांडिया चल रहा है। झारखंड में लोकसभा की कुल 14 सीटें हैं और इंडिया गठबंधन का हर घटक दल चाहता है कि उसे शीट शेयरिंग के तहत ज्यादा से ज्यादा सीटें मिले। कांग्रेस पार्टी जहां राज्य की दस लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है वहीं झामुमो भी इतनी ही सीटों की डिमांड कर रहा है।

इस तरह शीट शेयरिंग को लेकर इंडिया गठबंधन के घटक दल एकमत नहीं हैं। हालत ये है कि उनमें सीटों को लेकर रार की स्थिति है। राज्य में झामुमो और कांग्रेस अधिक से अधिक लोकसभा सीटों की डिमांड कर रहे हैं पर उनकी मांग व्यवहारिक नहीं है। झारखंड में लोकसभा सीटों के बंटवारे के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ सहयोगी दलों की गुरुवार को बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि पार्टी झारखंड में बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर दस लोकसभा सीटें देने का दबाव बनायेगी।

कांग्रेस का मानना है कि झामुमो को प्रदेश राजनीति की कमान दी गयी है तो राष्ट्रीय राजनीति में उसकी बड़े भाई की भूमिका बनती है। हालांकि लोकसभा सीटों को लेकर झामुमो की अलग ही दावेदारी है। पार्टी तय कर चुकी है कि वो राज्य की दस लोकसभा सीटों को लेकर दावेदारी करेगी। यही नहीं पार्टी चाईबासा सीट पर भी दावेदारी करेगी। इसके पीछे पार्टी का तर्क है कि चाईबासा लोकसभा सीट के अंतर्गत छह विधानसभा सीटें आती हैं और उनमें से पांच पर झामुमो का कब्जा है।

वहीं बीते लोकसभा चुनाव की बात करें तो पार्टी को पिछली दफा केवल चार लोकसभा सीटें मिली थीं जिसमें से एक में पार्टी जीत दर्ज करने में कामयाब रही थी। कांग्रेस सात सीटों पर लड़ी थी और झाविमो को दो सीटें मिली थीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 11 लोकसभा सीटों पर कब्जा जमाया था। एक सीट भाजपा की सहयोगी आजसू पार्टी ने जीती थी और एक पर झामुमो तथा एक सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार जीता था।

राजद, जदयू और वाम दलों की भी सीटों को लेकर अलग-अलग डिमांड है। राजद राज्य में चार सीटों पर चुनाव लड़ने को आतुर है। राजद के प्रदेश प्रवक्ता डॉ मनोज कुमार ने कहा कि पार्टी राज्य में चार लोकसभा सीटों पलामू, चतरा, कोडरमा और गोड्डा पर चुनाव लड़ना चाहती है और इसके लिए राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष को अवगत करा दिया गया है। 2019 के लोकसभा चुनाव में राजद ने दो सीटों पर कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था।

वहीं, जदयू की बात करें तो अभी पार्टी ने किसी लोकसभा सीट को लेकर दावा पेश नहीं किया है। इस संबंध में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को फैसला लेना है। इसी तरह  राज्य की तीन महत्वपूर्ण वाम पार्टियों यथा सीपीआई, सीपीआइ एम और सीपीआइएमएल ने तीन लोकसभा सीटों हजारीबाग, राजमहल और कोडरमा पर दावा ठोंका है। सीपीआइएमएल ने न सिर्फ राजमहल सीट पर उम्मीदवार उतारने का न सिर्फ राज्य कमिटी से प्रस्ताव पास कराया है बल्कि यह भी कहा है कि पार्टी जरूरत पड़ने पर दोस्ताना संघर्ष के लिए भी तैयार है।

बताते चलें कि झारखंड में सात दलों को मिलाकर ‘I.N.D.I.A’ (Indian National Developmental Inclusive Alliance) का कुनबा बना है। कांग्रेस, झामुमो, राजद, जदयू, भाकपा माले, भाकपा और माकपा इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं।

झारखंड में लोकसभा की 14 सीटें हैं और इंडिया गठबंधन की सात पार्टियां इसकी दावेदार हैं। इनके सामने सीटों का बंटवारा बड़ी चुनौती होगी। सात दलों के बीच 14 सीटें बांटना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। लोकसभा के पिछले चुनावों को देखें तो यूपीए के साथ गठबंधन में वैसा ही सबकुछ था, जैसा आज ‘I.N.D.I.A’ गठबंधन में दिखाई दे रहा है। सिर्फ एक दल जदयू इनके नए साथी के रूप में शामिल हुआ है। जदयू पहले एनडीए का हिस्सा था। 2019 में झाविमो (प्र) इनके साथ नए साथी के रूप में शामिल था।

अब चुनाव आयोग की सूची में झाविमो (प्र) का अस्तित्व नहीं रहा। झारखंड की राजनीति के जानकार बताते हैं कि पिछले परिणाम सीट बंटवारे का आधार बन सकते हैं। सीटों के बंटवारे को लेकर जब ‘I.N.D.I.A’ गठबंधन के बीच बात शुरू होगी, तो पिछले चुनावों को सामने रखा जाएगा। 2004 को छोड़ दें तो उसके बाद वामदल लोकसभा चुनाव के दौरान में यूपीए का हिस्सा कभी नहीं रहे, जबकि कांग्रेस, झामुमो और राजद मिलकर चुनाव लड़े. भाकपा माले और भाकपा अकेले चुनाव मैदान में थी। इसलिए सीटों के बंटवारे के दौरान ‘I.N.D.I.A’ गठबंधन पिछले लोकसभा के परिणामों और सीट बंटवारे के फॉर्मूले को आधार जरूर बनाएगा।

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