कोई अंग पाप का कारण बनता है तो उस अंग का ना रहना ही उचित: आर्च विशप विंसेंट आईन्द [If any organ becomes the cause of sin then it is better for that organ not to exist: Archbishop Vincent Iand]

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पिस्का नगड़ी। मनुष्य के लिए यदि उसका कोई अंग पाप का कारण बनता है तो उसके लिए उस अंग का ना रहना ही उचित होगा।

उक्त बातें रांची कैथोलिक महाधर्म प्रांत के आर्च विशप विंसेंट आईन्द ने संत अंथोनी चर्च सपारोम में आयोजित दृढीकरण संस्कार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने रविवार को सपारोम पल्ली के 77 बच्चे बच्चियों को दृढीकरण संस्कार से अभिभूषित किया और पवित्र आत्मा द्वारा प्रदत सात वरदान ज्ञान, विवेक, प्रज्ञा, निष्ठा, भय, ढृढता और परामर्श के बारे में जानकारी दिया।

ईसाइयों के नवनियुक्त आर्च बिशप विंसेंट आईन्द के पहली बार सपारोम पल्ली में पधारने पर पल्ली वासियो ने जोरदार तरीके से अपने धर्म गुरु का स्वागत किया। कैथोलिक सभा के सचिव प्रताप फुलजेंस ने आर्च विशप को सपारोम पल्ली के इतिहास से परिचय कराया।

इस अवसर पर क्लेरिसिन समाज के उप डेलिगेट सुपीरियर फादर अनीम प्रकाश, पल्ली पुरोहित फादर विजय पन्ना, विपिन खलखो, नीलम तिग्गा, मारिया सेलस्टीना सहित सैकड़ों की संख्या में आस पास के मसीही समुदाय के लोग उपस्थित थे।

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