गिरफ्तारी के खिलाफ उच्च न्यायालय फैसला नहीं सुना रहा: हेमंत सोरेन ने उच्चतम न्यायालय को बताया

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नयी दिल्ली : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से की गई गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर उच्च न्यायालय फैसला नहीं सुना रहा है।

सोरेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ को बताया कि उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका पर 28 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं सुनाया गया है।

हेमंत सोरेन को जमीन घोटाले मामले में 31 जनवरी को झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद गिरफ्तार किया गया था।

इस्तीफे के बाद पार्टी के वफादार और राज्य के परिवहन मंत्री चंपई सोरेन को उनकी जगह सीएम बनाया गया था।

प्रवर्तन निदेशालय ने 23 जून 2016 को हेमंत सोरेन समेत नौ अन्य और तीन कंपनियों के खिलाफ PMLA के तहत मामला दर्ज किया था।

हालांकि, हेमंत सोरेन ने मनी लॉंड्रिंग के आरोपों से इंकार कर दिया था। गिरफ्तारी के बाद जारी वीडियो में उन्होंने कहा था कि, एक साजिश के तहत “फर्जी कागजात” के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया है।

हेमंत सोरेन ने अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम का रुख किया था लेकिन कोर्ट ने उन्हें हाई कोर्ट में अपील करने का आदेश दिया था।

हेमंत सोरेन ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। इस याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अब तक कोर्ट ने फैसला नहीं सुनाया है इसलिए हेमंत सोरेन ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई की जा रही है।

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