HEC land controversy: HEC की जमीन पर मॉल बनाने की योजना पर सवाल, मजदूर संघ ने जताई बड़े भ्रष्टाचार की आशंका

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HEC land controversy:

रांची। HEC मजदूर संघ के महामंत्री रमा शंकर प्रसाद ने एचईसी प्रबंधन, खासकर निदेशक (कार्मिक) की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि एचईसी की बहुमूल्य जमीन पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और मॉल विकसित करने की योजना कंपनी के पुनरुद्धार के बजाय कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने की नीयत से बनाई जा रही है, जिसमें बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की आशंका है।

रमा शंकर प्रसाद ने बताया

रमा शंकर प्रसाद ने बताया कि इससे पहले भी एचईसी की जमीन झारखंड सरकार को औने-पौने दाम पर दी गई थी, जिससे कंपनी को 746 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। अगर इस राशि का सही और पारदर्शी उपयोग होता, तो एचईसी आज आत्मनिर्भर बन सकती थी। लेकिन आरोप है कि उस समय के तत्कालीन सीएमडी ने इस रकम को अन्य मदों में खर्च कर दिया। उन्होंने दावा किया कि 746 करोड़ में से केवल 446 करोड़ रुपये का ही लेखा-जोखा सामने आया है, जबकि करीब 300 करोड़ रुपये का कोई स्पष्ट विवरण आज तक नहीं है। इस मामले की जांच की मांग पहले ही भारी उद्योग मंत्रालय से की जा चुकी है।

महामंत्री ने सवाल उठाया

महामंत्री ने सवाल उठाया कि एचईसी प्रबंधन का दायित्व वर्क ऑर्डर लाना, उत्पादन बढ़ाना और कंपनी को मजबूत करना है, न कि मॉल और कॉम्प्लेक्स बनाने की योजनाएं तैयार करना। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यही सिलसिला जारी रहा तो एचईसी की बची-खुची जमीन भी खत्म हो जाएगी और कंपनी का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।

रमा शंकर प्रसाद ने स्पष्ट कहा

रमा शंकर प्रसाद ने स्पष्ट कहा कि यदि जमीन का उपयोग करना ही है तो वहां उद्योग और कारखाने लगाए जाएं, ताकि रोजगार के अवसर पैदा हों और एचईसी का वास्तविक पुनरुद्धार हो सके। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि किसी भी निर्णय से पहले उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए, मजदूर संघ और स्थानीय प्रतिनिधियों को प्रक्रिया में शामिल किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि निजी हितों के लिए एचईसी की जमीन देने की कोशिश का मजदूर संघ पुरजोर विरोध करेगा।

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