रांची : रिटायर्ड कार्डिनल फादर तेलेस्फोर पी टोप्पो सख्त बीमार हैं। उनके फेफड़े में पानी भर गया है। कल दोपहर अचानक उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया। इसके बाद बेहतर देखभाल के लिए उन्हें अस्पताल के आइसीयू में ट्रांसफर कर दिया गया। डॉक्टर ट्यूब के सहारे उनके फेफड़े से पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं। उनके स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए दुआ की अपील की गई है।
फादर तेलेस्फोर पी टोप्पो भारत के पहले आदिवासी हैं, जिन्हें ईसाई मिशनरी में कार्डिनल बनने का गौरव हासिल है। मिशनरी में सर्वोच्च धर्मगुरु पोप के बाद कार्डिनल का दर्जा ही सबसे ऊंचा होता है।
तेलेस्फोर पी टोप्पो कार्डिनल के पद से 24 जून 2018 को रिटायर हुए थे। इसके बाद उन्हें 1 सितम्बर को खूंटी के उलीहातू स्थित महागिरजाघर में आराम करने के लिए रखा गया था। उन्होंने यहां महागिरजाघर निर्माण का स्वप्न देखा था और उसे पूरा भी किया।
उन्होंने यहां रहने की इच्छा भी जाहिर की थी। फादर किशोर टोप्पो और सिस्टर इम्माकुलाता कुल्लू डीएसए की देखरेख में उन्हें वहीं रखा गया था।
ढलती उम्र की वजह से फादर टोप्पो का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा तो उन्हें वहां से करीब 25 मीटर की दूरी पर स्थित संत अन्ना वृद्धाश्रम में रखा गया। वहां कुछ दिन बिताने के बाद इसी साल फादर टोप्पो को बेहतर देखभाल के लिए मांडर के कॉन्सटंट लीवंस अस्पताल में भर्ती किया गया।
फादर तेलेस्फोर पी टोप्पो भले ही बढ़ती उम्र की परेशानियों से जूझ रहे हों, पर उनके नाम उपलब्धियों की फेहरिस्त है। एक बेहद ही गरीब परिवार में जन्म के बावजूद उन्होंने धर्मगुरु के तौर पर जो प्रतिष्ठा, हैसियत और स्थान हासिल किया, वह बेमिसाल है। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1939 को गुमला के चैनपुर में हुआ था।
अपने पिता के दस बच्चों में से उनका स्थान आठवां था। उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई संत जेवियर कॉलेज और धर्मशास्त्र की पढ़ाई रोम के पॉन्टिफिकल अर्बेनियन यूनिवर्सिटी से की। उन्हें 3 मई 1969 को बिशप फ्रांज वॉन स्ट्रेंग की ओर से पुजारी नियुक्त किया गया। तेलेस्फोर पी टोप्पो को 21 अक्टूबर 2003 को पोप जॉन पॉल द्वितीय की ओर से कार्डिनल बनाया गया था।
कार्डिनल चुने जाने पर उन्होंने कहा था कि कार्डिनल की उपाधि भारत में जनजातीय चर्च के लिए विशिष्टता का प्रतीक और इसके विकास की मान्यता है। वर्ष 2005 में आयोजित पोप कॉन्क्लेव में उन्होंने निर्वाचक की भूमिका निभायी थी। इस कॉन्क्लेव में जोसेफ रात्जिंगर को पोप बेनेडिक्ट 16वें के रूप में चुना गया था। वह उन कार्डिनल निर्वाचकों में से एक थे जिन्होंने वर्ष 2013 के पोप कॉन्क्लेव में हिस्सा लिया था जिसमें पोप फ्रांसिस का चयन किया गया था।
रोमन कैथोलिक चर्च के सबसे बड़ी संस्था कैथोलिक बिशप्स कांफ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) और कांफ्रेंस ऑफ कैथोलिक बिशप्स ऑफ इंडिया (सीसीबीआई) के वे अध्यक्ष भी रह चुके हैं। फादर तेलेस्फोर पी टोप्पो बहुभाषाविद हैं। हिन्दी के अलावा वे सादरी, मुंडारी, अंग्रेजी और इतालवी भाषा भी जानते हैं। कार्डिनल के रूप में वे जबर्दस्त लोकप्रिय रहे और हमेशा खुद को जनता की सेवा के लिए समर्पित रखा। उम्मीद की जानी चाहिए कि डॉक्टरों के अथक प्रयासों से वे बीमारियों से उबर जायेंगे।







