निशिकांत दुबे सांसदी का चौका लगाने को मैदान में, पांच सांसद रिंग से बाहर

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रांची। झारखंड की 14 लोकसभा सीटों पर 2024 के चुनावी मुकाबले की तस्वीर 2019 की तुलना में काफी बदल गई है।

2019 में चुनाव जीतने वाले पांच सांसद इस बार मुकाबले की रिंग से बाहर हैं। मौजूदा सांसदों में एकमात्र निशिकांत दुबे ऐसे हैं, जो लगातार चौथी बार संसद पहुंचने के लिए मैदान में उतरे हैं।

राज्य के तीन सांसद तीसरी बार और चार सांसद दूसरी बार चुनावी जंग में हैं।

सांसदी का “चौका” लगाने के लिए प्रयासरत निशिकांत दुबे ने गोड्डा संसदीय क्षेत्र से पहली बार 2009 में चुनाव लड़ा था और कांग्रेस के फुरकान अंसारी को हराकर संसद पहुंचे थे।

2014 में भी उन्हें दूसरी बार बड़े फासले से पराजित किया। 2019 में झारखंड विकास मोर्चा के प्रदीप यादव से उनका मुकाबला हुआ और तीसरी बार उन्होंने 1 लाख 84 हजार 227 मतों के अंतर से फिर जीत दर्ज की।

खास बात यह कि इन तीनों चुनावों में निकटतम प्रतिद्वंद्वियों पर जीत में वोटों का फासला बढ़ता चला गया।

पलामू से भाजपा के विष्णु दयाल राम, जमशेदपुर से विद्युत वरण महतो और राजमहल से झामुमो के विजय हांसदा लगातार तीसरी बार संसद पहुंचने की लड़ाई लड़ेंगे।

खूंटी से अर्जुन मुंडा, कोडरमा से अन्नपूर्णा देवी दूसरी बार संसद पहुंचने के लिए मैदान में उतरे हैं।

ये दोनों केंद्र की मौजूदा सरकार में मंत्री हैं। सिंहभूम से गीता कोड़ा और गिरिडीह से आजसू पार्टी के चंद्रप्रकाश चौधरी भी दूसरी बार संसद पहुंचने के लिए वोटरों की अदालत में हैं।

सिंहभूम की सांसद गीता कोड़ा ने इस बार पाला बदल लिया है। इस बार वह बतौर भाजपा प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि 2019 में उन्होंने इस क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की थी।

राज्य के पांच मौजूदा सांसद इस बार मैदान में नहीं हैं। इनमें हजारीबाग के जयंत सिन्हा, लोहरदगा के सुदर्शन भगत, धनबाद के पीएन सिंह, चतरा के सुनील सिंह और दुमका के सुनील सोरेन शामिल हैं।

ये पांचों भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं और इनकी जगह पार्टी ने नए चेहरों को प्रत्याशी बनाया है।

कई बड़े चेहरे ऐसे हैं, जिन्होंने पाला बदल लिया है। ऐसे लोग उसी पार्टी या गठबंधन के खिलाफ प्रचार करते दिखेंगे, जिसके लिए उन्होंने 2019 में वोट मांगे थे।

ऐसे नेताओं में बाबूलाल मरांडी बड़ा नाम हैं। 2019 के चुनाव में वह अपनी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा की ओर से यूपीए गठबंधन के प्रत्याशियों के लिए वोट मांग रहे थे।

2020 में उन्होंने अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया और अब बतौर प्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चुनाव प्रचार कर रहे हैं।

2019 में मांडू सीट से भाजपा के विधायक चुने गए जयप्रकाश भाई पटेल भी पाला बदलने वाले बड़े नेताओं में हैं।

वह हाल में कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और पार्टी ने उन्हें हजारीबाग सीट पर प्रत्याशी बनाया है।

ऐसे नेताओं में भाजपा छोड़कर राजद में गए गिरिनाथ सिंह और कांग्रेस में शामिल हुए सुखदेव भगत भी हैं।

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