मैग्नोलिया को तो सब जानते हैं लेकिन चरवाहे को कौन जानता है ?

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दयानंद राय

ब्रिटिश शासन हो या वर्तमान समय आदिवासियों के साथ अन्याय हर युग में होता रहा है, हालांकि समय के साथ इसमें कमी आयी है पर उनकी योग्यता और उनकी पहचान को दरकिनार करने के तिकड़म लगातार होते रहे हैं। झारखंड के इतिहास में आदिवासी नायकों की कमी नहीं है लेकिन इतिहास लेखन करनेवालों ने उनके साथ अपेक्षित न्याय नहीं किया।

जिन्होंने भी झारखंड में नेतरहाट का दौरा किया है, वहां घूमे हैं वे मैग्नोलिया प्वाइंट से जरूर परिचित होंगे। ये वो जगह है जहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा बड़ा नयनाभिराम दिखायी देता है। मैग्नोलिया एक अंग्रेज अफसर संभवत गवर्नर की बेटी थी।

नेतरहाट गांव में एक चरवाहा था जो सनसेट प्वाइंट के पास रोज आता था और अपने मवेशियों को चराता था। संभवत: वह आदिवासियों की विरजिया जाति का था। मवेशियों को चराते समय वह बहुत बढ़िया बांसुरी बजाता था। उसकी बांसुरी की गूंज पूरी घाटी में फैल जाती थी।

मैग्नोलिया ने एक बार उस चरवाहे को बांसुरी बजाते सुना। उसकी बांसुरी की आवाज ने मैग्नोलिया के दिल को छू लिया और मन ही मन वो बांसुरी बजानेवाले चरवाहे से प्यार करने लगी। दोनों के बीच समय के साथ प्यार परवान चढ़ता गया और दोनों एक-दूसरे के करीब आ गये।

मैग्नोलिया हर दिन घर से भागकर सनसेट प्वाइंट चली जाती और यहां चरवाहा उसे अपनी बांसुरी सुनाता। धीरे-धीरे दोनों के बीच प्यार की जानकारी मैग्नोलिया के पिता को भी हो गयी। उसे यह बेहद नागवार गुजरा कि कोई आदिवासी लड़का उसकी बेटी से प्यार करे।

पहले तो उसने समझाया कि वो उसकी बेटी से दूर रहा करे। पर प्यार में डूबे चरवाहे ने मैग्नोलिया से दूर रहने से इंकार कर दिया। इससे गुस्से में आकर अंग्रेज अधिकारी ने चरवाहे को मारकर खाई में फिंकवा दिया। जब इसकी जानकारी मैग्नोलिया को मिली तो वह रोने लगी। उसका दिल बार-बार चरवाहे को खोजता। चरवाहे की हत्या से आहत मैग्नोलिया घोड़े के साथ सनसेट प्वाइंट पहुंची और घोड़े सहित पहाड़ से कूद गयी।

इससे उसकी मौत हो गयी। इन दोनों की प्रेम कहानी को आकार देते हुए प्रशासन ने दोनों की प्रतिमा लगायी है। लेकिन सवाल अब भी वही है कि मैग्नोलिया को तो सब जानते हैं उस चरवाहे को कौन जानता है। उसका नाम क्या था। इतिहासकारों को अगर मैग्नोलिया का नाम पता चला तो थोड़ी कोशिश करके वे उसके प्रेमी का भी नाम ढूंढ सकते थे।

चूंकि मैग्नोलिया का प्रेमी आदिवासी था, आदिम जनजाति का था इसलिए उसका नाम जानने में किसी की दिलचस्पी नहीं हुई। लेकिन यह चरवाहे के साथ न्याय नहीं हुआ। हालांकि मैग्नोलिया ने अपने प्रेमी के साथ न्याय किया और जिस खाई में उसका प्रेमी हमेशा के लिए सो गया था वहीं वो भी चिर निद्रा में सो गयी।

दोनों का प्रेम अमर हो गया लेकिन हम आज भी नहीं जानते कि मैग्नोलिया का प्रेमी कौन था। कौन था वह बांसुरी वादक जो कृष्ण की तरह मोहिनी बांसुरी बजाता था। यह अधूरे इतिहास का एक कथानक है जिसमें नायक का नाम गुमनाम रह गया और नायिका को लोग आज भी जानते हैं।

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