Electricity workers
रांची। बिजली क्षेत्र के निजीकरण और प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 के विरोध में 12 फरवरी को देशभर में बिजलीकर्मी हड़ताल पर रहेंगे। यह घोषणा आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने की है। फेडरेशन देश के विभिन्न राज्य विद्युत निगमों, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए), दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में कार्यरत बिजली अभियंताओं का प्रतिनिधित्व करता है।
बिजली आपूर्ति ठप करने की चेतावनी
फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो हड़ताल के कारण देश के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति ठप की जायेगी। इस संबंध में केंद्र सरकार को औपचारिक नोटिस दिया गया है। फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि यह हड़ताल बिजली क्षेत्र में कार्यरत लाखों अभियंताओं और कर्मचारियों के गहरे असंतोष को दर्शाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां सार्वजनिक बिजली क्षेत्र को कमजोर कर रही हैं।
‘लाइटनिंग एक्शन’ के तहत काम छोड़ आंदोलन करेंगे
दुबे ने कहा कि यदि संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 पेश किया गया, तो बिजली कर्मचारी ‘लाइटनिंग एक्शन’ के तहत काम छोड़कर व्यापक जन आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने बताया कि बिजली देश की अर्थव्यवस्था, कृषि, उद्योग और ग्रामीण जीवन की बुनियाद है। उनके अनुसार प्रस्तावित संशोधन बिल और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 सस्ती बिजली, सार्वजनिक स्वामित्व, संघीय ढांचे और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के खिलाफ हैं।इनका भी कर रहे विरोधःफेडरेशन ने वितरण क्षेत्र में मल्टी लाइसेंसिंग, जबरन स्मार्ट मीटर लगाने, ट्रांसमिशन में पीपीपी और टीबीसीबी मॉडल, कार्यों के आउटसोर्सिंग और नौकरियों के ठेकेदारीकरण को बिजली व्यवस्था के लिए नुकसानदायक बताया।
फेडरेशन की मुख्य मांगे
फेडरेशन की प्रमुख मांगों में इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 को तुरंत वापस लेना, राष्ट्रीय विद्युत नीति को रद्द करना और बिजली निगमों के निजीकरण पर रोक लगाना शामिल है। इसके अलावा स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना को वापस लेने, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, खाली पदों पर भर्ती, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और संघीय ढांचे पर केंद्र के दबाव को रोकने की मांग भी की गई है।











