ED का चौंकाऊ खुलासाः हड़पी जा रही थी Ravindra nath Tagore की जमीन; जानिये, क्या है जमीन घोटाले का पूरा खेल, कैसे फंसे पूर्व CM Hemant Soren

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रांची, एजेंसियां। रांची में जमीन घोटाले की जांच कर रही ED ने सनसनीखेज खुलासा किया है। इसके मुताबिक रांची में जमीन के घोटालेबाजो ने नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रवींद्रनाथ टैगोर की जमीन भी हड़पने की कोशिश की थी।

कोशिश या कहें कि कागजात तैयार कर लिये गये और अब उसे बेचने की तैयारी थी। पर इससे पहले ही ED ने कार्रवाई कर दी।

आज की इस रिपोर्ट में हम बतायेंगे कि आखिर कैसे जमीन के धंधेबाजों ने अपना जाल बिछाया और कैसे ED पूर्व सीएम हेमंत सोरेन तक पहुंची।

ED ने इसका पूरा खुलासा अपनी चार्जशीट में किया है। दरअसल ये जमीन रवींद्रनाथ टैगोर के संबंधी हिमेंद्र नाथ टैगोर के नाम से है।

ED ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि बड़गाई अंचल के राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप के घर से मिले कागजात में कवि गुरु रबींद्रनाथ टैगोर के संबंधी हिमेंद्र नाथ टैगोर की जमीन के भी दस्तावेज मिले थे।

जब इसकी जांच की गई, तो पता चला कि इस जमीन के कागजात में भी हेराफेरी की गई है। इसके कई सबूत मिले कि इस जमीन को भी बेचने की तैयारी थी।

फिलहाल इसकी जांच चल ही रही है। टैगोर की यह जमीन बड़गाई मौजा के खाता नंबर 256 में है, जो गैरमजरुआ भूमि है। इसका कुल क्षेत्रफल 3.81 एकड़ है।

छापेमारी मे इस जमीन के म्यूटेशन नंबर 1523/2021-22 के दस्तावेज मिले थे। इसके अलावा चिल्ड्रेन एजुकेशन ट्रस्ट ऑफ इंडिया की 4.90 एकड़ और मोरहाबादी मौजा में 4.85 एकड़ जमीन के दस्तावेज और कोलकाता में पंजीकृत सेल डीड भी मिले हैं।

भानु ने पूछताछ में बताया कि विपिन सिंह नामक व्यक्ति अंचल कार्यालय आता-जाता था। वह गिरफ्तार अफसर अली, प्रियरंजन सहाय और शेखर कुशवाहा का नजदीकी था।

इन लोगों ने मिलकर फर्जीवाड़ा कर बड़ी संख्या में जमीन की हेराफेरी की है।

आइए, अब आपको बताते हैं रांची जमीन घोटाले की पूरी कहानी और इसमें कहां फिट बैठते हैं हेमंत सोरेन।

इस घोटाले की शुरुआत जून 2022 में हुई। बरियातू थाने में रांची नगर निगम के टैक्स कलेक्टर दिलीप शर्मा की ओर से एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें प्रदीप बागची नाम के शख्स को आरोपी बनाया गया।

आरोप था कि प्रदीप बागची ने फर्जी कागजातों के जरिए आर्मी की एक संपत्ति को हड़प लिया है। मामला आगे बढ़ा और इसकी जांच की जिम्मेदारी रांची के तत्कालीन कमिश्नर नितिन मदन कुलकर्णी को दी गई।

कुलकर्णी ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया कि फर्जी नाम और पते के आधार पर सेना की जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है।

अपनी रिपोर्ट में उन्होंने रांची के डीसी समेत जालसाजी में शामिल सभी अधिकारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा की थी, लेकिन मामला दब गया और न जांच हुई और न ही कार्रवाई।

फिर मामला मीडिया में उछला। तब रांची नगर निगम के टैक्स कलेक्टर की ओर से दर्ज केस के आधार पर ED ने इस केस में ECIR दर्ज की और जांच अपने हाथ में ले लिया।

इसके बाद ED ने नवंबर 2022 में रांची के बड़े व्यापारी और न्यूक्लियस मॉल के मालिक विष्णु अग्रवाल के साथ व्यापारी अमित अग्रवाल के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान इनके पास से कई अहम दस्तावेज ED के हाथ लगे।

ED ने जब इसकी जांच की तो पता चला कि 4.5 एकड़ की ये जमीन बीएम लक्ष्मण राव की थी, जिन्होंने आजादी के बाद इसे सेना को सौंप दिया था।

जांच बढ़ते-बढ़ते कोलकाता के रजिस्ट्रार ऑफ एश्योरेंस के दफ्तर तक पहुंची। जहां खुलासा हुआ कि 36 फर्जी डीड और कागजात के जरिए सैंकड़ों एकड़ जमीन का फर्जी सौदा हुआ है।

इसमें छोटे दफ्तर के अधिकारी से लेकर जिले के डीसी और बड़े-बड़े व्यापारी भी शामिल हैं।

सबूत एकत्र करने के बाद अप्रैल 2023 में ED ने प्रदीप बागची समेत सात आरोपियों के घर पर रेड डाली और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

उनमें से दो- अफसर अली और भानु प्रताप सरकारी कर्मचारी थे। अफसर अली सरकारी अस्पताल रिम्स में ग्रेड-3 का कर्मचारी था, जबकि भानु प्रताप रेवेन्यू सब-इंस्पेक्टर था।

बाकी सभी जमीन माफियाओं से जुड़े थे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीनों की बिक्री में शामिल थे। इसमें विष्णु अग्रवाल के मोबाइल से चौंकाने वाला खुलासा हुआ था।

इसके बाद 4 मई 2023 को ED ने रांची के डीसी रहे और आईएएस ऑफिसर छवि रंजन को भी गिरफ्तार कर लिया। छवि रंजन रांची में दो साल तक डिप्टी कमिश्नर रहे थे।

उन पर आरोप है कि इस पद पर रहते हुए उन्होंने कथित तौर पर जमीन की अवैध खरीद और बिक्री में मदद की थी।

इसके बाद घोटाले की कहानी परत दर परत खुलती ही चली गई। ED के मुताबिक, जमीन हड़पने के लिए ये पूरा सिंडिकेट बड़े ही सिस्टमाइज तरीके से काम करता था।

पुराने दस्तावेजों से असली मालिकों के नाम हटाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता था और फिर उनकी जगह नकली मालिकों के नाम लिख दिए जाते थे। इसके बाद सरकारी अधिकारी की मिलीभगत से फर्जी डॉक्यूमेंट तैयार किया जाता था

जांच के दौरान ED को पता चला कि रजिस्ट्रार ऑफिस के कई सरकारी अफसर इसमें मदद करते थे। तलाशी के दौरान ED ने आरोपियों के पास से सरकारी सील, पुराने स्टांप पेपर, कई डीड और रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट बरामद किए हैं, जो सिर्फ रजिस्ट्रार ऑफिस में पाए जाते हैं।

ED का दावा है कि फोरेंसिक जांच में इन दस्तावेजों के जाली होने की बात सामने आई है। जांच के दौरान ED ने पाया कि झारखंड में ऐसी दर्जनों जमीनें हैं, जिनके असली मालिक कोई और हैं, लेकिन इन्हें फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़प लिया गया।

अब आपको बताते हैं कि आखिर इस पूरे मामले में सीएमओ और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नाम कैसे आया। ED की पूछताछ में राजस्व उपनिरीक्षक ने सबसे पहले हेमंत सोरेन का नाम लिया। उसने स्वीकार किया कि हेमंत सोरेन के आदेश पर ही जमीन का सर्वे कराया गया था।

दरअसल, ED ने इस केस में गिरफ्तार राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद का बयान लिया, तो उन्होंने बताया कि 8.46 एकड़ जमीन का सर्वे का आदेश सीएम हाउस से आया था।

उन्हें इस जमीन के सर्वे का आदेश उदय नाम के व्यक्ति ने दिया था। उदय ने तब कहा था कि बॉस की जमीन है।

ED के अधिकारियों ने जब भानु प्रताप प्रसाद से पूछा कि बॉस कौन है, तब उसने हेमंत सोरेन का नाम लिया था। साथ ही भानु ने बताया कि उन्हें सर्वे का आदेश सीओ मनोज कुमार ने भी दिया था।

इसके बाद ED ने मनोज कुमार का बयान लया। मनोज कुमार ने भी स्वीकार किया कि जमीन हेमंत सोरेन की है। उन्हें ही सभी बॉस कहते हैं।

दोनों सरकारी पदाधिकारियों के गवाही के बाद ED ने पहली बार सीएम हेमंत सोरेन को 13 अगस्त 2023 को समन किया, लेकिन मुख्यमंत्री लगातार सात समन पर अनुपस्थित रहे।

आठवें समन पर उनसे 20 जनवरी को पहली बार पूछताछ हुई थी। इसके बाद अगली पूछताछ के दौरान यानी 31 जनवरी को तो ED ने पूर्व सीएम हेमंत सोरेन को गिरफ्तार ही कर लिया।

अब आपको बताते हैं, उस जमीन के बारे में जिसके कारण पूर्व सीएम हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ा। बरियातू की जिस जमीन को लेकर सीएम हेमंत सोरेन से पूछताछ की गई थी, वह डीएवी स्कूल बरियातू के पीछे है।

12 प्लॉट में बंटी जमीन का कुल रकबा 8.46 एकड़ है। ED की जांच रिपोर्ट में जिक्र है कि पूरी जमीन’ की बाउंड्री की हुई है। वहीं इस जमीन में एक आउट हाउस और गार्ड रूम भी बना हुआ है।

ED के मुताबिक इस जमीन पर बैंक्वेट हाल बनाने की तैयारी की जा चुकी थी। परंतु जैसे ही जांच शुरू हुई, आनन फानन में जमीन अवैध तरीके से अंचल अधिकारियों की मदद से मूल रैयत के नाम वापस कर दी गई और इसके कागजात भी सात दिनों के अंदर तैयार करा लिये गये।

अपनी चार्जशीट में ED ने तिथिवार पूरा डिटेल दिया है कि जमीन कैसे वापस मूल रैयत को हस्तांतरित की गई। ED का कहना है कि जमीन की वापसी के इस खेल में भी मुख्यमंत्री के पद के प्रभाव का इस्तेमाल किया गया है।

इधर ED ने हेमंत सोरेन पर एक नया आरोप लगाया है कि उन्होंने केस का रूख मोड़ने के इरादे से ED अधिकारियों पर केस दर्ज कराया है। ED ने इसे लेकर कोर्ट में मामला दर्ज कराते हुए सीबीआइ जांच की मांग की है।

बता दें कि रांची पुलिस ने ईडी के सहायक निदेशक कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार और एक अन्य अधिकारी को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए थाने में बुलाया था।

हालांकि हाईकोर्ट ने इस नोटिस पर रोक लगा दी थी। ED ने कोर्ट में कहा था कि जमीन घोटाले में चल रही जांच को बाधित करने और सबूत मिटाने के इरादे से हेमंत ने यह केस दर्ज कराया था।

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