कुत्तों का कब्रिस्तान कहां है जानते हैं?

IDTV Indradhanush
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जमशेदपुर : कुत्तों के मसाज पार्लर या स्वीमिंग पुल के बारे में तो आपने सुना होगा। पर क्या कुत्तों के कब्रिस्तान के बारे में सुना है। तो आइए आज हम आपको कुत्तों के कब्रिस्तान की कहानी सुनाते हैं। कुत्तों का यह कब्रिस्तान लौहनगरी जमशेदपुर के टेल्को में स्थित है।

इस कब्रिस्तान को मैनेज टाटा मोटर्स करता है। टेल्को स्थित डॉग केनॉल देश की एक मात्र ऐसी जगह है। जहां कुत्तों को मरने के बाद फेंका नहीं जाता, बल्कि उसकी वाफादारी को याद रखने के मकसद से उसकी समाधि बनायी जाती है। यहां हर समाधि पर कुत्तों की वफादारी के कारनामे दर्ज हैं। टाटा मोटर्स जो देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी है, जहां भारी वाहनों से लेकर मंझोले वाहनों का निर्माण किया जाता है।

कंपनी की सुरक्षा की जिम्मेवारी सुरक्षा गार्डों के अलावा कुत्तों पर भी रहती है। कुत्ते कंपनी की सुरक्षा के लिए दिन-रात लगे रहते हैं। कंपनी प्रबंधन भी कुत्तों की देखभाल में कोई कोर कसर नहीं छोड़ता है। इतना ही नहीं, जो कुत्ते सेवा देते-देते मर जाते हैं। टेल्को केनॉल परिसर में उन्हें सम्मान देने के लिए उनकी समाधि बना दी जाती है। इस अनोखे कब्रिस्तान में 40 कुत्तों की समाधियां हैं।

साथ ही सभी समाधियों पर मृत कुत्तों के कारनामों को भी दर्ज किया गया है। इस अनोखे कब्रिस्तान के संबंध में टाटा मोटर्स के सिक्यूरिटी हेड स्क्वार्डन लीडर नसीब सिंह कादियन ने बताया कि यहां पर कुत्तों को बचपन से पाल–पोस कर प्रशिक्षण भी दिया जाता है। फिलहाल यहां 13 कुत्ते है। हालांकि इसमें से एक कुत्ते के रिटायर होने के कारण उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है।

यहां के कुत्ते शहर के अलावा देश मे अन्य जगहों पर होने वाले  कई डॉग शो मे हिस्सा लेकर सैकड़ों ईनाम जीत चुके  हैं। इतना ही नहीं सारे कुत्ते टाटा मोटर्स की सुरक्षा के लिए काम तो करते ही हैं समय–समय पर जिला प्रशासन इन कुत्तों की मदद भी लेता है। इस केनाल क्लब के केयर-टेकर संजय कुमार का कहना है कि कुत्तों की वफादारी के किस्से तो कई हैं लेकिन, कुत्तों के मरने के बाद इस प्रकार की इज्जत दिया जाना पूरे देश के लिए गौरव की बात है।

टाटा मोटर्स के सिक्यूरिटी हेड ने बताया कि जब इस केनाल क्लब में कुत्तों को लाया  जाता है तो उसका नामकरण टी शब्द से किया जाता है। चूंकि ये कुत्ते टाटा ग्रुप के लिए काम करते हैं। इसलिए मरने के बाद टाटा ग्रुप इन कुत्तों के सम्मान में इन्हें अपना प्रतीक देते हैं।

सिक्यूरिटी हेड ने बताया कि वर्तमान समय में जितने भी कुत्ते इस केनाल क्लब में हैं, उन सभी कुत्तों का नाम टी से है। इस अनोखे केनाल में पहली बार 22 नवंबर 1962 को जन्मे राणा बॉन एक्रव नामक कुत्ते को 31 मार्च 1965 में समाधि दी गयी थी।

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