Jharkhand legal action
धनबाद। झारखंड सरकार अब बकाया नहीं चुकानेवाले केंद्रीय उपक्रमों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी। धनबाद जिला प्रशासन की ओर से चार केंद्रीय लोक उपक्रमों और खनन कंपनियों पर 183.85 अरब बकाया है। राजस्व वसूली के लिए इन सभी नोटिस भेजा गया है।
जिन केंद्रीय लोक उपक्रमों को नोटिस भेजा गया है, उनमें भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) मुगमा, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड ( सेल ) चासनाला और टाटा स्टील लिमिटेड झरिया शामिल है। नोटिस की तिथि से 15 दिन के अंदर रकम जमा करने का निर्देश दिया गया है। राशि जमा नहीं करने पर कंपनियों के विरुद्ध सर्टिफिकेट केस दायर किया जाएगा।
निर्धारित अनुमति से अधिक का किया खनन
जिला खनन पदाधिकारी रितेश राज तिग्गा के अनुसार इन कोयला खनन कंपनियों ने निर्धारित अनुमति से अधिक जगह से वर्ष 2000 से 2010 के बीच कोयले का उत्खनन किया। इसमें भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) की 46, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल मुगमा) की 8, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) चासनाला की 2 और टाटा स्टील लिमिटेड झरिया डिवीजन की 3 कोलियरियां शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत बकाया वसूली
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में इन कोयला कंपनियों से करीब 183.85 अरब रुपए की वसूली की जाएगी। इसमें बीसीसीएल को चांच विक्टोरिया, गोविंदपुर एरिया, कतरास एरिया, सिजुआ एरिया, बरोरा एरिया, ब्लाक टू एरिया, कुसुंडा एरिया, पीबी एरिया, बस्ताकोला एरिया, लोदना एरिया, ईस्टर्न झरिया तथा वेस्टर्न झरिया की कोलियरी के लिए 17,337.87 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। टाटा स्टील लिमिटेड झरिया डिवीजन को 385.19 करोड़ रुपए, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड मुगमा एरिया को 328.77 करोड़ रुपए भुगतान करना है। जबकि, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) चासनाला को 333.42 करोड़ रुपए का भुगतान करना है।
रकम वसूली के लिए खनन पदाधिकारी अधिकृत
राज्य सरकार ने आदेश जारी कर कोयला कंपनियों से रकम वसूली के लिए जिला खनन पदाधिकारी और सहायक खनन पदाधिकारी को अधिकृत किया है। उन्होंने बताया कि खान व भूतत्व विभाग के सचिव अरवा राजकमल ने इस संदर्भ में अधिसूचना जारी की है। कोयला कंपनियों का पक्ष भी सुना गया है। दिसंबर तक सुनवाई के बाद अब नोटिस देकर आगे की कार्रवाई की तैयारियां है। कोयला कंपनियों की ओर से राशि जमा नहीं करने की स्थिति में उनके विरुद्ध सर्टिफिकेट केस दर्ज किया जाएगा। जिला खनन विभाग ने इसको लेकर संबंधित कंपनियों के अधिकारियों को इस मामले से भी अवगत करा दिया है।


















