इस बड़े फैसले से समस्या होगी दूर
धनबाद। धनबाद का कोलफील्ड इलाका। कहते हैं…. यहां पैसा बरसता है। पर यहां के लोगों की जिंदगी दांव पर लगी है। झरिया में बीते कई सालों से जमीन के नीचे आग धधक रही है। इस वजह से कई लोगों की जान भी जा चुकी हैं। अब तो हालत और भी खराब हो गई है।
जमीन के नीचे धधकती आग की वजह से जमीन धंस रही है। जमीन धंसने के बाद नीचे से जहरीली गैस ऊपर आ रही है। इसके कारण यहां बड़े-बूढ़े तो बीमार पड़ ही रहे हैं, बच्चों की भी जान पर बन आयी है। खासकर पैदा होने वाले बच्चे और नवजातों के स्वास्थ्य को लेकर विशेषज्ञ कई बार चिंता जता चुके हैं। इतना ही नहीं, इस क्षेत्र में कार्यरत कई समाज सेवी संगठन इसे लेकर चिंता जता चुके हैं और सरकार को कई सर्वे रिपोर्ट सौंप चुके हैं।
इन रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि इन हालात में कभी भी हादसा हो सकता है। अब जाकर इसे लेकर प्रशासन अलर्ट हो गया है। प्रशासन ने खदान क्षेत्रों में खतरनाक जोन में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का फैसला किया है। दरअसल, झरिया में कई सालों से जमीन के नीचे आग धधक रही है। इस वजह से अब तक दर्जनों जानें जा चुकी हैं।
इसे लेकर प्रशासन अब अलर्ट मोड में है। प्रशासन ने इन क्षेत्रों के लोगों को कहीं और शिफ्ट करने की योजना बनाई है। अग्नि प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए जगह देखी जा रही है। इस योजना के तहत आग और खतरा प्रभावित इलाकों से हर हफ्ते 10 से 15 परिवारों को एक साथ सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जायेगा। बताते चलें कि धनबाद के डीसी बरुण रंजन झरिया पुनर्वास विकास प्राधिकार के प्रबंध निदेशक भी हैं।
उन्होंने इसे लेकर अधिकारियों को कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि खतरनाक क्षेत्रों में रह रहे लोगों को हर हफ्ते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके। डीसी बरुण रंजन के मुताबिक अगर कोई परिवार शिफ्ट करने से इनकार करता है, तो उन परिवारों को नोटिस जारी की जायेगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि खतरे वाले क्षेत्रों से एक बार लोगों का विस्थापन हो जाये, तो वहां निर्माण या अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा। बीसीसीएल के अधिकारी के अनुसार अग्नि प्रभावित क्षेत्रों में एक लाख परिवार रह रहे हैं। जिनमें बत्तीस हजार चौंसठ परिवार कानूनी रूप से रह रहे हैं।
वहीं बहत्तर हजार आठ सौ बयासी परिवार अवैध रूप से बीसीसीएल की जमीन पर रह रहे हैं। बताते चलें कि केंद्र सरकार के झरिया मास्टर प्लान के तहत अग्नि प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को अगस्त दो हजार इक्कीस तक सुरक्षित स्थानों में स्थानांतरित कर दिया जाना था, लेकिन अब तक केवल दो हजार छह सौ सतासी परिवारों को ही अन्यत्र शिफ्ट किया जा सका है।
प्रशासन इसका कारण जगह और आवास की कमी बताता है। धनबाद जिला के अधिकारियों के अनुसार झरिया अग्नि प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को पुनर्वास करने के लिए बेलगारिया टाउनशिप में छह हजार तीन सौ बावन क्वार्टर्स बनाए गए हैं। इसमें अब तक खतरनाक क्षेत्रों से दो हजार छह सौ सतासी परिवार शिफ्ट किए जा चुके हैं।
वहीं, झरिया के ही सिजुआ और जोगता क्षेत्र में जमीन के नीचे लगी आग के कारण लगातार बन रहे गोफ के कारण पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। हालांकि प्रशासन नियमित रूप से सूचना मिलते ही गोफ की भराई कराता रहता है, पर इन गोफ से निकल रही गैस लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। कई गोफ से लगातार गैस का रिसाव हो रहा है। पिछले पंद्रह अगस्त को सिजुआ में धरते फटने से एक पिता पुत्र घर समेत इसमें समा गये थे।
हालांकि दोनों को कुछ युवकों ने बचा लिया। अब ये पिता पुत्र अस्पताल से घर लौट आये हैं। पिता श्याम लाल भुइया ने बताया कि उनका तो घर ही गोफ में समा गया। अब तो न घर है और न कोई सामान। पहनने को कई दूसरा कपड़ा तक नहीं है। यहां के लोग नाराज हैं कि जब भी गोफ बनता है, बीसीसीएल सिर्फ बने गड्ढों को समतल कर छोड़ देता है। नतीजा होता है कि बच्चे इन खाली जगहों पर खेलते रहते हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बहरहाल प्रशासन ने अब यहां के लोगों की जिंदगी बचाने की मुहिम शुरू कर दी है।Ovyeo>









