कोयला कारोबारी और भाजपा नेता राजेंद्र साहू का निधन, बालूमाथ में होगा अंतिम संस्कार

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रांची : कोयला कारोबारी और भाजपा नेता राजेंद्र साहू नहीं रहे। सोमवार सुबह तीन बजे रांची के मेडिका अस्पताल में उन्होंने अपनी आखिरी सांसें लीं। 12 अगस्त को अपराधियों ने उन्हें गोली मार दी थी। उनकी मृत्यु की खबर फैलते ही बालूमाथ में जन आक्रोश फूट पड़ा। इसके बाद सैकड़ों लोग लाठी-डंडे के साथ सड़कों पर उतर आये। गुस्साये लोगों ने रांची से चतरा जानेवाली सड़क जाम कर दी और एक संदिग्ध आरोपी के घर के बाहर खड़ी स्कोर्पियो गाड़ी जला दी।

राजेंद्र राजेंद्र साहू का जन्म एक गरीब कृषक परिवार में हुआ था। पर अपनी काबिलियत से राजनीति और कोयले के व्यवसाय में उन्होंने बड़ी पहचान बनायी थी। अपने करियर की शुरुआत राजेंद्र ने बस एजेंट के तौर पर की थी। बाद में वे बालूमाथ बस स्टैंड में चाय बेचने लगे थे। लोगों को उनकी चाय के साथ उनका व्यवहार भी पसंद आया। जब यहां उनका बिजनेस बढ़ा तो वे धीरे-धीरे कोयले के धंधे में उतरे और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। कोयले की ट्रांसपोर्टिंग और रैक लोडिंग का काम वे कर रहे थे।

पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष राजेंद्र साहू की प्रखंड में सामाजिक वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका थी। वे प्रखंड की सद्भावना समिति के भी अध्यक्ष थे। हाइवा ऑनर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रहते हुए सामाजिक कार्यों में भी वे बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे।

राजेंद्र साहू गैंगस्टर अमन साहू के अलावा अन्य उग्रवादी संगठनों के भी निशाने पर थे। यही नहीं, बालूमाथ मंडल रामनवमी पूजा समिति के भी वे अध्यक्ष थे। वर्ष 2012 में भाकपा माओवादी के उग्रवादियों ने बारुदी सुरंग लगाकर उनका घर उड़ा दिया था। ऐसे में तीन मंजिला मकान से कूदकर उन्होंने अपनी जान बचायी थी। हालांकि, इस घटना में उनके दोनों पैर टूट गये थे। बाद में उन्होंने इस मकान का पुनर्निर्माण कराया था। उनका रांची के रातू रोड में रिलायंस मार्ट के पीछे भी आवास था।

तीन बेटियों और एक बेटे के पिता राजेंद्र राजेंद्र साहू निडर स्वभाव के व्यक्ति थे। बालूमाथ प्रखंड मुख्यालय के रहनेवाले राजेंद्र साहू को रंगदारी की मांग को लेकर पूर्व में भी धमकी दी गयी थी। एक बार उनपर जानलेवा हमला किया गया था पर अपनी चालाकी से वे बच निकले थे। राजेंद्र प्रसाद साहू चतरा लोकसभा क्षेत्र से सांसद का चुनाव लड़ चुके थे। इसके अलावा सामाजिक कार्यों में वे बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहते थे। युवाओं के बीच वे खासा लोकप्रिय थे।

उनकी हत्या में अमन साहू गिरोह का हाथ बताया जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि जेल में बंद अपराधी अमन साहू ने मयंक सिंह को लेकर बड़ा खुलासा किया था। बीते दिनों अमन साहू को लातेहार पुलिस ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। इस दौरान उसने बताया था कि राजेंद्र साहू, विकास कुमार तिवारी, रंजीत गुप्ता, अब्दुला अंसारी, लवलेश्वर महतो, सुमित चटर्जी, विकास तिवारी, मनोज यादव, आरकेटीसी कंपनी और ऋत्विक कंपनी के अधिकारी उसके निशाने पर हैं।

बता दें कि  राजेंद्र साहू पर साल 2021 में भी गोलीबारी हुई थी। अपाची बाइक पर सवार तीन अपराधियों ने चेन्नई राधा कंपनी के क्रशर में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इसमें क्रशर के एक कर्मी संदीप कुमार गुप्ता और लोडर ऑपरेटर पप्पू केसरी को गोली लगी थी। चेन्नई राधा कंपनी राजेंद्र साहू की थी। कंपनी मगध कोलियरी से कोयला उठाव कर क्रश करती थी। राजेंद्र से पूर्व में भी रंगदारी मांगी गई थी।

पर उन्होंने रंगदारी देने से मना कर दिया था। उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिली थी। जिसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी थी। पर हर तरह की सतर्कता के बाद अपराधियों ने उन्हें निशाने पर ले ही लिया और बालूमाथ में राजनीति और कारोबार का एक बड़ा चेहरा मौत की नींद सो गया।

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