रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने बड़ा फैसला लिया है। इससे शहरी क्षेत्र के लाखों लोगों की पुरानी मांग पूरी होने जा रही है।
दरअसल राज्य के शहरी क्षेत्रों में मकानों को नियमित किया जायेगा। बिना नक्शे के बने 49 फीट तक ऊंचे मकानों को नियमित किया जा सकेगा।
राज्य सरकार इसके लिए एकमुश्त छूट योजना ला रही है। नगर विकास विभाग में वर्षों से लंबित इस प्रस्ताव को सीएम चंपाई सोरेन ने मंजूरी दे दी है।
इसके बाद इसे अगली कैबिनेट की बैठक में लाया जायेगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही राज्यभर में यह योजना लागू हो जाएगी।
इस कानून के लागू होने के बाद पूर्व में बनी बिल्डिंग रेगुलराइजेशन पॉलिसी में संशोधन कर एकमुश्त राशि लेकर ऐसे मकानों को वैध किया जा सकेगा।
योजना के तहत तय अवधि में बिना नक्शे के बने मकानों को नियमित नहीं कराने वालों से सरकार डेढ़ गुना होल्डिंग टैक्स वसूल करेगी।
बता दें कि चैंबर ऑफ कॉमर्स, व्यापारी वर्ग, बिल्डर और आम लोगों ने नगर विकास से बिना नक्शा के बने ऐसे भवनों को नियमित करने की मांग की थी।
राज्यभर में ऐसे 7 लाख मकान हैं, जो इस छूट योजना से लाभान्वित हो सकते हैं। वहीं रांची में करीब 2.40 लाख मकान हैं।
इनमें 35 हजार से अधिक का नक्शा स्वीकृत है। यानी, 2 लाख मकान नियमित होंगे।
क्या है नई नीति में
राज्य के अवैध मकानों को वैध करने के लिए तैयार नीति में कहा गया है कि 15 मीटर (49.2 फीट) ऊंचाई तक के बने मकानों को नगर निकाय एकमुश्त योजना के तहत नियमित कर सकेगा।
यह सुविधा 6994 वर्ग फीट तक के प्लाट पर बने घरों के लिए ही होगी। नियमावली तैयार करने के बाद एसओपी की प्रक्रिया जारी होगी।
बता दें कि पुरानी बिल्डिंग रेगुलराइजेशन पॉलिसी में कहा गया था कि 15 वर्ग मीटर ऊंचे तीन मंजिले भवन को नियमित किया जाएगा।
ऊंचाई के साथ तीन मंजिला शब्द के कारण ही भवनों को नियमित करने में पेंच फंस रहा था।
नई नीति में केवल 15 वर्ग मीटर ऊंचा भवन लिखने के कारण बड़ी संख्या में ऐसे मकान या अपार्टमेंट या किसी तरह के भवन इसके दायरे में आ जाएंगे।
इसके अलावा पहले 500 वर्गमीटर क्षेत्रफल में बने घरों को ही वैध करने का नियम था। अब उसे 650 वर्ग मीटर (6994 वर्ग फीट) किया गया है।
पहले शर्त थी कि आदिवासी खाते की जमीन या ग्रीन लैंड या ओपन स्पेस में घर बना है तो वह नियमित नहीं होगा। अब इसमें भी कुछ छूट देने की योजना है।
इससे पहले वर्ष 2019 में तत्कालीन सरकार ने बिल्डिंग रेगुलराइजेशन पॉलिसी को मंजूरी दी थी। लेकिन, सरकार की नियमावली से चंद लोगों को ही फायदा मिल सका था।
रांची में करीब 300 आवेदन आए थे। इनमें से 220 मकानों को जुर्माना लेकर वैध किया गया था। 2011 में भी बिल्डिंग रेगुलराइजेशन पॉलिसी लाई गई थी।
उस समय नगर निगम में 870 आवेदन जमा हुए थे, लेकिन मात्र 280 घरों का नक्शा पास हुआ था।
इसे भी पढ़ें
पाकिस्तान में पुन: मतगणना के दौरान गोलीबारी में दो लोगों की मौत, 14 घायल








