Hari Okhar waterfall
चतरा। झारखंड के चतरा जिले के कान्हाचट्टी प्रखंड में स्थित हरि ओखर जलप्रपात इन दिनों सैलानियों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन गया है। जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर पहाड़ों और घने जंगलों के बीच स्थित यह जलप्रपात अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जाना जा रहा है।
आकर्षण का कारण
हरि ओखर जलप्रपात का सबसे बड़ा आकर्षण इसका विशाल और गहरा प्राकृतिक कुंड है। स्थानीय भाषा में ‘ओखर’ का अर्थ पत्थरों के बीच बना गहरा कुंड होता है। ऊंचाई से गिरती जलधारा जब चट्टानों से टकराती है तो एक खास तरह की गूंज और ध्वनि उत्पन्न होती है, जो पर्यटकों को अलग ही अनुभव प्रदान करती है। कुंड का पानी इतना साफ और स्वच्छ है कि तल में पड़े पत्थर साफ नजर आते हैं। यहां दुर्लभ मछलियों की कई प्रजातियां भी पाई जाती हैं।
सुबह के समय सूर्य की किरणें जब जलधारा पर पड़ती हैं तो पानी की बूंदें चमक उठती हैं, जिससे यह दृश्य और भी आकर्षक हो जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ‘हरि’ शब्द भगवान विष्णु का प्रतीक है और प्राचीन काल में इस स्थान पर ऋषि-मुनियों द्वारा साधना की जाती थी, जिससे यह स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखता है।
नववर्ष और मकर संक्रांति के अवसर पर बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पुलिस बल और स्थानीय गोताखोरों की तैनाती की गई है। फिसलन भरे रास्तों और गहरे कुंड को देखते हुए पर्यटकों से सावधानी बरतने की अपील भी की जा रही है। हालांकि इतनी प्राकृतिक सुंदरता के बावजूद हरि ओखर जलप्रपात अब भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। यहां तक पहुंचने के लिए बेहतर है।

