चंपई सोरेन के सामने विश्वासमत के बाद के नये चैलेंज

5 Min Read

रांची। झारखंड में 2 फरवरी को चंपई सोरेन के नेतृत्व में जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनी। सीएम चंपई सोरेन जब राजभवन में शपथ ले रहे थे, तो जेएमएम-कांग्रेस के करीब तीन दर्जन विधायक एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए विशेष विमान से हैदराबाद जा रहे थे।

जिसके बाद यह चर्चा होने लगी थी कि गठबंधन में शामिल विधायकों में कहीं न कहीं कोई नाराजगी है और इस कथित नाराजगी को लेकर विश्वास मत प्रस्ताव को लेकर भी तरह-तरह की बातें हो रही थी। लेकिन अब चंपई सोरेन ने आसानी से बहुमत हासिल कर विरोधियों को जवाब देने में सफलता हासिल की।

झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र में सोमवार को सीएम चंपई सोरेन ने आसानी से बहुमत साबित साबित कर दिया। विश्वास मत के पक्ष में 47 वोट पड़े, जबकि विरोध में सिर्फ 29 मत ही मिले। मुख्यमंत्री चंपई सोरेन पहली अग्निपरीक्षा में सफल रहे हैं और अब वे आगामी बजट सत्र की तैयारी में जुट गया।

पक्ष-विपक्ष के कुल 77 विधायक सदन में मौजूद थे। जबकि जेएमएम के रामदास सोरेन, बीजेपी के इंद्रजीत महतो और निर्दलीय अमित महतो अनुपस्थित थे। रामदास सोरेन और इंद्रजीत महतो की तबीयत खराब हैं, इस बात की जानकारी सभी को पहले से थी। लेकिन बरकट्ठा के निर्दलीय विधायक अमित यादव ने वोटिंग के दौरान गायब रह कर सभी को चौंकाया।

विश्वास मत के समर्थन में सीएम चंपई सोरेन को 47 वोट प्राप्त हुए। जबकि विश्वास मत के विरोध में 29 वोट पड़े। सत्तापक्ष के समर्थन में जो 47 वोट पड़े, उसमें जेएमएम के 27, कांग्रेस के 17, आरजेडी के 1, झाविमो के 1, सीपीआई-एमएल के 1 और मनोनीत एक विधायक का वोट शामिल हैं।

सीएम चंपई सोरेन के विश्वास मत को लेकर बीजेपी और विरोधी दल के नेताओं की ओर से तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे। लेकिन वोटिंग के दौरान विश्वास मत के विरोध में सिर्फ 29 वोट ही पड़े। इनमें बीजेपी के 25, आजसू पार्टी के तीन और एनसीपी के कमलेश कुमार सिंह का वोट शामिल हैं। विश्वास मत को लेकर विधानसभा में वोटिंग के दौरान निर्दलीय विधायक सरयू राय ने हिस्सा नहीं लिया।

बहरहाल अब तो चंपई सोरेन ने विश्वासमत हासिल कर लिया है और अब उनकी सरकार बजट सत्र की तैयारियों में जुट गई है। पर यह आम बजट सत्र नहीं होने जा रहा है। सरकार की स्थिरता की दृष्टि से इसका महत्व इस बार खास होनेवाला है।

क्योंकि अब चंपई सोरेन के सामने पहली और सबसे बड़ी चुनौती है मंत्रिमंडल का बंटवारा। और यह न चंपई के लिए आसान है और न ही कांग्रेस और झामुमो के लिए। गठबंधन की सरकार में सभी दल और उनके सभी विधायकों को खुश रख पाना आसान नहीं होगा।

नये मंत्रिमंडल में पुराने चेहरों को स्थान मिलेगा या नहीं, हेमंत सोरेन के करीबी कौन लोग मंत्री होंगे, लोबिन या सीता सोरेन कहां और कैसे एडजस्ट होंगे। कल्पना सोरेन की इसमें क्या भूमिका होगी। इसके अलावा कांग्रेस के अंदर भी मंत्री पद को लेकर तूफान से पहले की खामोशी छाई है।

 मंत्री पद के सबसे ज्यादा दावेदार कांग्रेस में ही मौजूद हैं। मंत्री पद के बंटवारे के बाद नाराज लोगों को संभालना बड़ी चुनौती होगी। वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा के अंदर भी खलबली मची है। क्योंकि कल्पना सोरेन ने भी अपने इरादे स्पष्ट कर दिये हैं कि अब वह राज्य में एक्टिव पॉलिटिक्स से दूर नहीं रहनेवाली।

इससे बसंत सोरेन की महत्वाकांछा को भी ठेस पहुंच सकती है और सीता सोरेन के सपने भी धूमिल होंगे। ऐसी स्थिति में मुश्किलों से कम करने के लिए अब हेमंत सोरेन भी नहीं हैं। और जो संजीवनी राहुल गांधी चंपई सरकार को दे गये हैं, उसे बार-बार देने के लिए वह भी नहीं आनेवाले हैं।

दरअसल कांग्रेस के कुछ नाराज विधायकों की नाराजगी दूर करने में राहुल गांधी की न्याय यात्रा ने बड़ी भूमिका निभायी है। पर हर बार चुनौतियों को आसान करने के लिए राहुल गांधी भी तो नहीं रहेंगे।

इसे भी पढ़ें

झारखंड में मैट्रिक-इटर की परीक्षा शुरू

Share This Article
कोई टिप्पणी नहीं