केंद्र ने नहीं दी झारखंड में राष्ट्रपति शासन की मंजूरी

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रांची। झारखंड में राष्ट्रपति शासन के लिए केंद्र तैयार नहीं हुआ। वर्ना राजभवन ने तो इसकी अनुशंसा कर ही दी थी। और शायद यही वजह है कि राज्य में सरकार गठन में इतनी देर हुई।

जानकारी के अनुसार राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा उसी दिन कर दी थी, जिस दिन उन्होंने राज्य के अधिकारियों के साथ बैठक की थी।

बैठक में रिपोर्ट लेने के बाद उन्होंने लॉ एंड ऑर्डर की पूरी रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी थी। इसमें विधि-व्यवस्था का हवाला देते हुए राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा की गई थी।

पर केंद्र ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। दरअसल, राष्ट्रपति शासन लगाने की पृष्ठभूमि उसी दिन तैयार हो गई थी, जिस दिन रविवार को ईडी ने दिल्ली में हेमंत सोरेन के आवास पर छापेमारी की थी।

अगले दिन सोमवार दोपहर तक जब हेमंत सोरेन सामने नहीं आए तो राज्यपाल ने मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव (गृह) और डीजीपी को राजभवन बुलाया और पूरी रिपोर्ट ली थी।

इसके बाद मंगलवार को स्टेज वन के तहत पहली रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी।  इसमें राज्य के मौजूदा हालात के बारे में जानकारी दी गई। इसके अगले दिन बुधवार को सीएम हेमंत सोरेन को ईडी ने पूछताछ के बाद गिरफ्तार करने की सूचना दी और उन्हें लेकर राजभवन पहुंचे।

वहां हेमंत सोरेन ने अपने पद से इस्तीफा दिया।  इसके बाद राज्यपाल ने स्टेज-2 के तहत राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दी।

इस बीच चंपई सोरेन विधायक दल के नये नेता चुने गये और पीछे-पीछे वे भी 43 विधायकों का समर्थन पत्र लेकर राजभवन पहुंच गये। वहां उन्होंने राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया और विधायकों के परेड कराने की बात भी कही।

पर चूकि हेमंत सोरेन के इस्तीफा सौंपने से पहले ही सारे विधायक राजभवन पहुंच गये थे, इसलिए पहली बार उन्हें बाहर कर दिया गया। इसके बाद फिर चंपई सोरेन और आलमगीर आलम को दुबारा अंदर बुलाया गया।

इस दौरान विधायक बाहर नाराजगी व्यक्त करते रहे। इधर केंद्र से जवाब के इंतजार में सरकार गठन में देर होती चली गई। अंतत: जब केंद्र से कोई जवाब नहीं आया, तब राज्यपाल ने गुरुवार की रात 11 बजे चंपई सोरेन को राजभवन बुलवाया।

चंपई रात 11.15 बजे राजभवन पहुंचे, तब उन्हें शुक्रवार को शपथ ग्रहण करने को कहा गया। फिर रात 11.30 बजे चंपई सोरेन और आलमगीर आलम राजभवन से बाहर निकले। बहरहाल अब राज्य में सरकार गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है और दोपहर 12 बजे चंपई सोरेन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

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