Sarna religion code:
रांची। झारखंड में सरना धर्म कोड के बगैर ही जनगणना कराये जाने की तैयारी हो रही है। भू-राजस्व एवं निबंधन विभाग ने झारखंड में जनगणना कराने के लिए आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर लिया है। केंद्र सरकार द्वारा जनगणना कराने का गजट नोटिफिकेशन के बाद राज्य सरकारों को भी उस अनुरूप राज्यों में गजट नोटिफिकेशन करना है, क्योंकि जनगणना का विषय केंद्रीय सूची में होने के बाद भी इसमें राज्य सरकारों का सहयोग आवश्यक है। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए राज्य सरकारों को 31 जुलाई तक गजट नोटिफिकेशन करने का निर्देश दिया गया था।
विभागीय मंत्री ने दी सहमतिः
इस निर्देश के अनुरूप राज्य सरकार के भू-राजस्व विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है। उस पर विभागीय मंत्री ने अपनी स्वीकृति दे दी है। अब इसे स्वीकृति के लिए कैबिनेट को भेजा जाएगा।
सरना कालम का जिक्र नहीः
इस प्रस्ताव में जनगणना कॉलम में सरना धर्म कोड का कॉलम जोड़ने का कोई जिक्र नहीं है। बता दें कि झामुमो, कांग्रेस समेत कई अन्य पार्टियां जनगणना धार्मक कॉलम में सरना धर्म कोड का कॉलम जोड़ने की मांग करती रही है। विधानसभा से भी इस संबंध में सर्व सम्मत प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेजा गया था।
इधर केंद्र सरकार द्वारा जनगणना कराए जाने की तिथि घोषित किए जाने के बाद राज्य सरकार के शीर्ष स्तर पर इसको लेकर चर्चा की जा रही थी। उसमें राज्य सरकार द्वारा सरना धर्म कोड का कॉलम जोड़े जाने की प्रविष्टि कर दिए जाने की बात भी कही जा रही थी। पर राज्य सरकार ने अपने प्रस्ताव में सरना धर्म कोड का कॉलम जोड़ने की बात नहीं कही है।
धर्म परिवर्तन का आंकड़ा चौंका सकता हैः
जनगणना से जुड़े शीर्ष अधिकारियों के अनुसार इस बार जनगणना के बाद राज्य की आबादी में बढोत्तरी सुनिश्चित है। यह स्वभाविक भी है। जिस तरह से झारखंड सहित अन्य राज्यों की जनसंख्या बढ़ रही है, यह कोई नयी बात नहीं है। लेकिन जनगणना में धर्म परिवर्तन का आंकड़ा राज्य में राजनीति का विषय बन सकती है।
खास कर कितने सरना धर्मावलंबी मुसलमान या ईसाई में कनवर्ट हुए, यह आंकड़ा भी सामने आएगा। इसमें 2011 की जनगणना की तुलना में इस बार सरना से ईसाई या मुसलिम बने लोगों की संख्या बढ़ेगी।
जातीय जनगणना से स्पष्ट होगा सरना धर्मावलंबियों का आंकड़ाः
जातीय जनगणना भी होने के कारण यह भी स्पष्ट होगा कि राज्य में कितने सरना आदिवासी हैं। उसमें भी कितने उरांव, कितने मुंडा, कितने हो, कितने संथाल और अन्य। हर जाति और उसकी उप जातियों की जनसंख्या सामने आएगी। हालांकि केंद्र सरकार ने अभी तक जातीय जनगणना का फॉरमेट को अंतिम रूप नहीं दिया है। फॉरमेट को अंतिम रूप देने के बाद कई और तरह के आंकड़े के भी सामने आने का रास्ता दिखेगा।
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