भाजपा को दूसरे दल से आईं महिला नेताओं पर भरोसा

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बीजेपी ने जातीय समीकरण भी बदला

रांची। अब तक झारखंड में भाजपा महिलाओं को टिकट देने में सबसे आगे दिख रही है। भाजपा झारखंड की 14 में से 13 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है।

पार्टी ने सभी 13 सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी है। 13 में तीन सीटों पर भाजपा ने महिलाओं को टिकट दिया है।

यह कुल सीटों का लगभग 23 फीसदी है। पर भाजपा ने पार्टी का सालों साल झंडा ढोने वाली महिला नेता को किनारे करते हुए दूसरे दलों से आई महिलाओं पर भरोसा दिखाया है।

भाजपा को शायद कोई भी महिला कार्यकर्ता चुनाव लड़ने के योग्य नहीं लगीं। कुछ दिनों पहले कांग्रेस से आई गीता कोड़ा को चाईबासा से और झामुमो छोड़ पार्टी में शामिल हुईं सीता सोरेन को दुमका से उतारा गया है।

इससे पहले भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में राजद की प्रदेश अध्यक्ष रही अन्नपूर्णा देवी को कोडरमा सीट से टिकट दिया था।

इधर, अब तक की राजनीति स्थिति के अनुसार कांग्रेस झारखंड में सात सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।

इनमें धनबाद, गोड्डा, रांची, खूंटी, लोहरदगा, हजारीबाग और पलामू सीट है। लेकिन, गोड्डा एकमात्र ऐसी सीट है, जहां दीपिका पांडेय सिंह टिकट की दौड़ में शामिल हैं।

झामुमो में भी कमोवेश यही स्थिति है। केवल दुमका संसदीय क्षेत्र से झामुमो प्रत्याशी के रूप में कल्पना सोरेन के नाम की चर्चा चल रही है।

अगर पलामू की सीट राजद के खाते में गई तो यहां से ममता भुइंया प्रत्याशी हो सकती हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इन दलों में तीन महिलाओं को टिकट मिलने की संभावना नहीं के बराबर है।

लोकसभा चुनाव में भाजपा भले ही महिलाओं को टिकट देने में आगे है, लेकिन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अभी भी भाजपा और झामुमो पर भारी है।

भाजपा से तीन महिला विधायक हैं। पुष्पा देवी, नीरा यादव और अपर्णा सेनगुप्ता। झामुमो से जोबा माझी, सबिता महतो और बेबी देवी विधायक हैं।

सीता सोरेन के पार्टी छोड़ने के कारण झामुमो की महिला विधायकों की संख्या एक घट गई है।

लेकिन, कांग्रेस में महिला विधायकों की संख्या सबसे अधिक चार है। अंबा प्रसाद, दीपिका सिंह पांडेय, पूर्णिमा नीरज सिंह और शिल्पा नेहा तिर्की।

वहीं, अगर जाति समीकरण की बात करें, तो झारखंड में भाजपा ने इस बार किसी राजपूत जाति का उम्मीदवार नहीं बनाया।

पिछली बार भाजपा ने धनबाद से पीएन सिंह और चतरा से सुनील कुमार सिंह को टिकट दिया था।

दोनों चुनाव जीत कर लोकसभा भी पहुंचे थे, लेकिन इस बार दोनों ही सांसदों का टिकट काट दिया है।

पीएन सिंह उम्र के कारण तो सुनील कुमार सिंह की लोगों से उनकी दूरी बढ़ने के कारण पार्टी ने उन पर भरोसा करना ठीक नहीं समझा।

इसी तरह कायस्थ जाति से भी उम्मीदवार नहीं बनाया। जबकि, 2019 के चुनाव में भाजपा ने हजारीबाग से जयंत सिन्हा को टिकट दिया था।

इस बार चतरा में भूमिहार जाति से कालीचरण सिंह का प्रवेश जरूर हुआ। वहीं, ओबीसी से प्रत्याशियों की संख्या में भी वृद्धि हुई।

पिछली बार ओबीसी से संजय सेठ, अन्नपूर्णा देवी, विद्युत वरण महतो को प्रत्याशी बनाया गया था।

इस बार इनके अलावा ओबीसी समुदाय से धनबाद से ढुल्लू महतो और हजारीबाग से मनीष जायसवाल के रूप में दो प्रत्याशी बढ़े हैं।

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