रांची। भाजपा का एक प्रतिनिधमंडल प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की अगुवाई में मंगलवार की शाम राज्यपाल से मिला। बीजेपी नेताओं ने राज्यपाल से आग्रह किया कि गांडेय में उपचुनाव होना संवैधानिक नहीं है। इसलिए इस संबंध में वह चुनाव आयोग को निर्देश दें।
राज्यपाल से मुलाकात के बाद बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने गांडेय विधायक सरफराज अहमद को जबरन इस्तीफा दिलाया। अफरा-तफरी के माहौल में विधायक दल की बैठक बुलाई। हमने पहले ही कहा था कि सरकार के कार्यकाल में 1 साल से भी कम समय बचा है, ऐसे में गांडेय में उपचुनाव नहीं हो सकता।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी यही कहता है। लोकसभा चुनाव को लेकर आदर्श आचार संहिता लगेगी, ऐसे में बमुश्किल 8 महीने ही बचे हैं। हमने राज्यपाल से यही कहा है कि गांडेय में उपचुनाव नहीं होना चाहिए। वे निर्चावन आयोग को चिट्ठी भेजें और विधिसम्मत निर्णय लें।
राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात के बाद मीडिया से बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हमने राज्यपाल को झारखंड की ताजा सियासी हालात से अवगत कराया है। हमने राज्यपाल को बताया कि संवैधानिक या कानूनी दृष्टिकोण से झारखंड के गांडेय विधानसभा सीट पर उपचुनाव संभव नहीं है, क्योंकि हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में 1 साल से भी कम समय बचा है।
यदि उसमें लोकसभा चुनाव को लेकर लगने वाली आदर्श आचार संहिता को जोड़ लें तो वह भी केवल 8 महीने का ही कार्यकाल रह जाता है। ऐसे में गांडेय विधानसभा सीट पर उपचुनाव संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन होगा। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार ने गांडेय विधायक डॉ. सरफराज अहमद से इस्तीफा दिलाकर राज्य में राजनीतिक अस्थिरता के हालात पैदा कर दिए हैं। यह जनता को भ्रम में डालने का प्रयास है।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मुश्किलों में घिरे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले तो गांडेय विधायक से जबरन इस्तीफा लेकर अधीरता दिखाई और फिर अफरा-तफरी के माहौल में विधायक दल की बैठक बुला ली। झारखंड मुक्ति मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल राज्य निर्वाचन विभाग से मिला और गांडेय सीट पर आनन-फानन में उपचुनाव कराने की मांग की।
झामुमो का तर्क है कि पहली विधानसभा 6 जनवरी 2020 को अधिवेशित हुई थी और उस हिसाब से 31 दिसंबर 2023 को इस्तीफा देने से रिक्त हुई गांडेय विधानसभा सीट का कार्यकाल 1 साल से अधिक बचा है। पर ऐसा नहीं है। जिस दिन मतगणना के बाद निर्वाचन आयोग ने जीते हुए सदस्यों की सूची जारी कर दी और राज्यपाल को इससे अवगत करा दिया, उसी दिन से विधानसभा का कार्यकाल आरंभ मान लिया जाता है। ऐसे में गांडेय पर उपचुनाव संभव नहीं है।
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