गांडेय : पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने सोमवार को गांडेय में एक सभा को संबोधित किया।
कार्यक्रम में कल्पना ने कहा कि भाजपा संविधान बदलने का षडयंत्र रच रही है।
भाजपा जब भी सत्ता में आयी है उसने आदिवासी दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के शोषण को बढ़ावा ही दिया है।
उन्होंने कहा कि झारखण्ड अलग राज्य गठन होने के बाद ज्यादातर समय भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने राज्य में शासन किया।
डबल इंजन सरकार बनाते ही भाजपा ने CNT/SPT एक्ट को समाप्त करने का कानून बना विधानसभा से पारित कर दिया।
उस समय हेमन्त विपक्ष में थे जिसका मजबूती से उन्होंने विरोध किया, दिशोम गुरू के नेतृत्व में झामुमो ने राष्ट्रपति से मुलाकात भी की।
पूरे राज्य से आप लोगों ने समर्थन दिया और उसका परिणाम हुआ कि भाजपा सरकार को उस काले कानून को वापस लेना पड़ा।
दिशोम गुरूजी के नेतृत्व में अलग झारखण्ड राज्य बनाने में आप सभी गांडेय, पीरटांड, टुंडी, गिरिडीह और बेंगाबाद के लोगों का अहम योगदान रहा है।
जब हेमन्त को झारखंड की कमान मिली तो उनके सामने लक्ष्य स्पष्ट था, लक्ष्य था उन उद्देश्यों को पूरा करना जिसके लिए अलग झारखण्ड राज्य निर्माण का आन्दोलन लड़ा गया था।
राज्य निर्माण की लड़ाई लड़ने वाली पार्टी को 2019 में पहली बार पूर्ण रूप से काम करने का मौक़ा मिला। यह बात भाजपा के लोग पचा नहीं पाए।
जिन्हें सत्ता में रहने की आदत हो गयी थी वे लोग अपनी हार पचा नहीं पचा पाए और येन-केन-प्रकारेण देश के सबसे लोकप्रिय आदिवासी मुख्यमंत्री को परेशान करने में लग गए। अमर वीर शहीदों का आशीर्वाद और करोड़ों झारखंड वासियों का आशीर्वाद है।
आप सबों का प्यार है जो हेमन्त को झामुमो के अन्य असंख्य आन्दोलनकारियों की तरह संघर्ष के कठिन रास्ते पर चलने को प्रेरित करता रहता है।
इस विकट परिस्थिति में हम एकजुट होकर हेमन्त जी के साथ हो रहे विद्वेषपूर्ण अन्याय का हिसाब लेकर रहेंगे।
आपकी झारखण्डी सरकार राज्य के सभी लोगों के लिए सर्वजन पेंशन योजना लायी। आज राज्य के 36 लाख लोगों को पेंशन योजना के तहत लाभ दिया जा रहा है।
मुझे नहीं लगता है कि अब किसी गांव में कोई बुजुर्ग, विधवा, दिव्यांग पेंशन मिलने का इन्तजार कर रहा होगा।
आदिवासी, दलित एवं सभी वर्ग की महिलाओं के लिए पेंशन की उम्र सीमा को घटाकर 50 वर्ष कर दिया गया है। अब पेंशन के लिए 60 वर्ष का इन्तजार नहीं करना पड़ता है।
आदिवासी समाज के पारंपरिक प्रधानों को मासिक मानदेय दिया जा रहा है। राज्य के आन्दोलनकारियों के लिए पेंशन की अलग योजना भी लायी गयी है।
मैं यहां बाबा दिशोम गुरु और हेमन्त की सिपाही के रूप में खड़ी हूं। आदिवासियों से भाजपा की नफरत की कहानी कोई नयी नहीं है।
आप सभी को याद होगा भाजपा ने 15 हजार से अधिक आदिवासियों पर केस दर्ज करवा दिया था।
इन्हीं केस को हेमन्त जी ने अपनी सरकार की पहली कैबिनेट में निर्णय लेकर हटाया। आदिवासी, दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक विरोधी है भाजपा और उसकी सहयोगी दल।
आने वाले चुनावों में हमें मिलकर इन तानाशाही ताकतों को जवाब देना है। आग्रह है कि 21 अप्रैल को रांची के प्रभात तारा मैदान में आयोजित होने वाली उलगुलान न्याय महारैली में शामिल होकर अपने बेटे, अपने भाई हेमन्त जी के हाथ और मजबूत करें तथा इंडिया गठबंधन को ताकत दें।
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