Teacher appointment:
रांची। झारखंड हाईकोर्ट में हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति की राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट को चुनौती देने वाली कुल 252 याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई पूरी हो गई, जिसके बाद न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिकाकर्ताओं ने नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी, पारदर्शिता की कमी और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
उन्होंने दावा किया कि सरकार द्वारा दाखिल जवाब में कई तथ्यात्मक त्रुटियां हैं और मेरिट लिस्ट में अयोग्य अभ्यर्थियों को स्थान दिया गया है, जिससे योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन हुआ है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं अजीत कुमार, चंचल जैन और तेजस्विता ने अदालत से न्यायिक आयोग के गठन की मांग की, जो नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे। वहीं राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता ने याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के अनुसार की गई है और सभी आवश्यक दस्तावेज सरकार के पास उपलब्ध हैं। सरकार ने यह भी सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को आवेदन दें, जो दस्तावेजों का सत्यापन कर उचित निर्णय ले सकता है।
अदालत ने दोनों पक्षों की बात सुनी
अदालत ने दोनों पक्षों की मौखिक बहस सुनने के बाद उन्हें अपनी-अपनी लिखित बहस दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब पूरे राज्य की नजरें इस बहुप्रतीक्षित निर्णय पर टिकी हैं, क्योंकि इससे न केवल शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता तय होगी, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य का रास्ता भी साफ होगा।
यह फैसला झारखंड में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता और प्रक्रिया पर एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे राज्य की प्रशासनिक ईमानदारी और न्यायिक हस्तक्षेप की भूमिका भी स्पष्ट होगी।
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