भोपू और बैनर-पोस्टर गायब, चुनाव प्रचार का बदला ट्रेंड

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रांची। भाईयों और बहनों। चाचा-चाची कर्मठ, सुयोग्य और आपके अपने प्रत्याशी को बहुमूल्य वोट देकर भारी मतों से विजयी बनाएं…।

चुनाव चिन्ह पर बटन दबाएं…। मुख्य सड़क, गली और मुहल्लों में थोड़ी-थोड़ी देर पर चुनाव और वोट की तारीख बताने वाले ये प्रचार वाहन इस बार चुनाव से लगभग गायब हैं।

रांची, धनबाद, जमशेदपुर जैसे शहरों में चुनाव प्रचार वाहन इक्के-दुक्के ही दिख रहे हैं। दरअसल, चुनाव आयोग के डंडे ने प्रचार का तरीका बदल दिया है।

अब झंडा और बैनर नहीं दिखाई देते हैं। लाउडस्पीकर का शोर भी थम गया है। चुनावी नारों से रंगी दीवारें अब नजर नहीं आती हैं।

इस बदलाव ने आम लोगों को काफी राहत दी है। अब चुनाव का ज्यादातर जोर मोबाइल फोन और सोशल मीडिया पर है।

लोकसभा चुनाव में पांच चरण का मतदान सम्पन्न चुका है। बाकी दो चरणों के लिए चुनाव का जोर पकड़ रहा है।

लेकिन, माहौल देखकर लग ही नहीं रहा कि 5 साल बाद आम चुनाव हो रहा है। भाजपा, कांग्रेस और राजद की प्रचार सामग्री बेचने वाले कारोबारियों का कहना है कि इस बार नए तरह के स्टीकरों, गमछों और हेड बैंड का आर्डर दिया है।

पुरानी डिजाइन के झंडे, बिल्ले और टोपी का चलन खत्म हो गया है। उम्मीदवार भी नई ट्रेंड के प्रचार सामग्री की मांग कर रहे हैं, जो युवाओं और महिलाओं को आकर्षित कर सके। साथ ही, लोगों को ऑनलाइन प्रचार ज्यादा भा रहा है।

सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने वालों, उम्मीदवारों के लिए फेसबुक, ट्विटर हैंडल का काम देखने वालों और रील बनाने वालों का धंधा तेजी से चमका है।

उम्मीदवार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और रील बनाने वालों को हायर कर रहे हैं और अच्छी रकम पर अपना कंटेंट फेसबुक, इंस्टाग्राम व एक्स पर चला रहे हैं।

आम लोग भी प्रत्याशियों व नेताओं के पोस्ट देख, सुनकर आनंद उठा रहे हैं।

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