मंत्री पद की शपथ लेने से पहले बड़े भाई हेमंत से मिले बसंत सोरेन

3 Min Read

रांची। पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के छोटे भाई बसंत सोरेन भी चंपई सोरेन के मंत्रिमंडल में शामिल हो गये हैं।

उन्होंने शुक्रवार को राजभवन में आयोजित समारोह में मंत्री पद की शपथ ली। शपथ लेने से पहले वह बड़े भाई हेमंत सोरेन से मिलने होटवार जेल पहुंचे।

आधे घंटे तक वह बड़े भाई के साथ रहे। उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने बड़े भाई के टिप्स लिये।

बता दें कि पिछले दिनों दुमका में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बसंत सोरेन बड़े भाई हेमंत सोरेन को याद कर मंच पर ही भावुक होकर रोने लगे थे।

उनकी आंखों में आंसू थे। रूंधे गले से उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा था कि उनका भाई हेमंत सोरेन हमेशा गरीबों के लिए सोचता है।

गरीबों, दलितों, शोषितों की आवाज हेमंत सोरेन है। आज उस आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।

पहली बार विधायक बने और मंत्री भी

बता दें कि बसंत सोरेन दुमका से झामुमो के विधायक हैं और अब जेएमएम कोटे से मंत्री भी हैं।

2020 में पहली बार वह विधायक बने। और पहली बार में ही उन्हें मंत्री पद भी मिल गया है। बसंत सोरेन का जन्म साल 1980 में हुआ था।

वह दिशोम गुरु शिबू सोरेन और रूपी सोरेन के छोटे बेटे हैं। बसंत की पत्नी का नाम हेमलता सोरेन हैं। वह दुमका उपचुनाव जीत कर सदन पहुंचे हैं।

उन्होंने 2020 में हुए दुमका उपचुनाव में जीत हासिल की। उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी पूर्व मंत्री लुईस मरांडी को लगभग 7 हजार वोट से हराया था।

दुमका सीट हेमंत सोरेन के छोड़ने से खाली हुई थी। इससे पहले बसंत सोरेन ने 2016 में राज्यसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

2016 राज्यसभा चुनाव के बाद बसंत सोरेन संगठन स्तर पर लगातार काम करते रहे। इस दौरान उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा।

कई बार कयास लगते रहे लेकिन संगठन की मजबूती की कवायद में वो जुटे रहे। दुमका क्षेत्र में वह लगातार सक्रिय रहे।

इसी का नतीजा रहा कि 2020 उपचुनाव में पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया और वो जीतकर पहली बार विधायक 41 साल की उम्र में विधायक बने।

अब उनके सामने हेमंत सोरेन का उत्तराधिकारी बनकर दिखाना बड़ी चुनौती है।

इसे भी पढ़ें

बीसीसीआई ने कहा, एनसीए सभी के लिए उपलब्ध नहीं है

Share This Article
कोई टिप्पणी नहीं