रांची : झारखंड में हुई जमीन की लूट में खुद राज्य के मुख्यमंत्री को फंसने का डर है। यही कारण है कि ईडी के बुलाने पर भी वे वहां नहीं जा रहे है। जमीन की लूट में फंसने से बचने के लिए वे महंगे वकीलों की सेवाएं लेने में लगे हैं। अगर उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है तो ईडी के बुलावे पर वहां जाकर अपनी बात रखते। ये बातें बुधवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहीं।
वे प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बोल रहे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित उनके परिजनों पर नाम बदल बदलकर जमीन लूट में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रांची में दहरू मुंडा नाम के एक आदिवासी की जमीन वर्ष 2002 में हेमंत सोरेन ने हेमंत कुमार सोरेन के नाम से खरीदी। इसी तरह रांची से संतालपरगना तक जमीन खरीद में शिबू सोरेन ने शिव सोरेन बनकर जमीन ली।
शिबू सोरेन के बेटे बसंत सोरेन ने इस काम के लिए पिता का नाम शिव कुमार सोरेन दिखाया है। श्री मरांडी ने कहा कि राज्य का आदिवासी सीएम ही आदिवासियों की जमीन लूटने में लगा है। ऐसे कई उदाहरण हैं जिसके जरिये सोरेन परिवार ने अकूत संपत्ति बनाई है। ऐसी सरकार को तो बर्खास्त होना चाहिए और उन्हें जेल जाना चाहिए।
श्री मरांडी ने कहा कि राज्य की भ्रष्ट और लूटेरी सरकार के कारनामों और उसके हकीकत को जनता को 17 अगस्त से राज्य भर में शुरू होने वाली संकल्प यात्रा के दौरान बताया जायेगा। श्री मरांडी ने कहा कि सच यही है कि 23 साल पहले भाजपा के अग्रणी नेता और पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने अलग झारखंड राज्य का गठन किया।
अर्जुन मुंडा, रघुवर दास समेत उनके कार्यकाल में झारखंड के विकास के लिए काम हुए। अभी झामुमो, कांग्रेस और राजद गठबंधन की सरकार में राज्य में केवल लूट मची है। बल्कि थाना से लेकर अंचल और बीडीओ कार्यालय में बगैर पैसे के कोई काम नहीं हो रहा। प्रेसवार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक,प्रवक्ता अमित सिंह उपस्थित थे।








