3 दिन हुई बहस
रांची। जमीन घोटाला मामले में गिरफ्तार पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की जमानत याचिका पर आज झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई।
जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अदालत में पिछले तीन दिनों तक सुनवाई हुई। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
गुरुवार को ईडी की ओर से वकील एसवी राजू ने पक्ष रखते हुए कहा कि हेमंत सोरेन को जमानत नहीं दी जा सकती है।
वह प्रभावशाली व्यक्ति हैं। उन्हें जमानत मिल जाता है तो जांच प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य की मिशनरी का इस्तेमाल करते हुए वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
वहीं, ED ने कोर्ट को बताया कि हेमंत सोरेन ने अवैध तरीके से बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन पर कब्जा किया है। यह पीएमएलए-2002 में निहित प्रावधानों के अनुसार मनी लांड्रिंग है।
ईडी के पास सबूत नहीं, सिर्फ अनुमान लगा रहीः मीनाक्षी
हालांकि, हेमंत सोरेन का पक्ष सुप्रीम कोर्ट के वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने रखा। उन्होंने कहा कि इस केस में मनी लांड्रिंग का मामला नहीं बनता है।
यह पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध का मसला है। उन्होंने कहा कि ED अपनी चार्जशीट में जिस जमीन पर बैंक्वेट हॉल बनाने की बात कही है, वह महज उनका अनुमान है।
इससे पहले हेमंत सोरेन के वकील ने कोर्ट को बताया कि जिस 8.86 एकड़ जमीन को लेकर ईडी कार्रवाई कर रही है, वह उनके नाम है ही नहीं।
ईडी सिविल मामले को क्रिमिनल बना रही है। ऐसे में उन्हें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की तर्ज पर जमानत दी जाए।
बड़गाई की जमीन पर हेमंत का कब्जाः ईडी
वहीं 12 जून को हुई दूसरी सुनवाई में ईडी ने अपना पक्ष रखा। ईडी की ओर से एडवोकेट एसवी राजू ने हाईकोर्ट को बताया कि हेमंत सोरेन बरियातू के बड़गाई की 8.86 एकड़ की जिस जमीन को लेकर अपनी अनभिज्ञता बता रहे हैं, दरअसल में वह जमीन उनके नाम से ही है।
इस बात की पुष्टि खुद पूर्व सीएम के प्रेस सलाहकार रहे अभिषेक प्रसाद पिंटू ने अपने बयान में की है। यही बात बड़गाई अंचल के सीओ और राजस्व कर्मी भानु प्रताप ने भी पूछताछ में कही है।
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