आलमगीर आलम मंत्री पद छोड़ेंगे या जेल से चलायेंगे विभाग

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रांची। मंत्री आलमगीर आलम की गिरफ्तारी के बाद से झारखंड के सियासी गलियारे में एक बड़ा सवाल तैर रहा है।

ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम मंत्री पद छोड़ेंगे या जेल से ही विभाग चलायेंगे। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की तर्ज पर वह पद पर बने रहेंगे या हेमंत सोरेन की तरह इस्तीफा दे देंगे, इस जवाब का इंतजार पूरे झारखंड को है।

हालांकि अब तक आलमगीर आलम ने इस्तीफा नहीं दिया है। और कहें, तो ईडी ने भी उनके इस्तीफे को लेकर वो तेजी नहीं दिखाई, जो हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद दिखाई थी।

संभवतः ये केजरीवाल प्रकरण का असर हो, जिन्होंने गिरफ्तारी के बाद भी इस्तीफा नहीं दिया और जेल से ही सरकार चलाने की घोषणा कर दी।

अब वह जेल से बाहर निकल कर कह रहे हैं कि हेमंत सोरेन को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। बहरहाल इस सवाल का जवाब अगले चंद दिनों में मिल जायेगा।

फिलहाल ईडी को आलमगीर आलम की छह दिनों की रिमांड मिल गई है और वह कल से अपनी पूछताछ शुरू कर देगी।

कई बड़े नामों का हो सकता है खुलासाः

इधर चर्चा है कि मंत्री से पूछताछ में कई बड़े नाम का खुलासा हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि कई नेता और बड़े अधिकारी भी ईडी की रडार में है जो इस कमीशन के खेल का अहम हिस्सा थे।

बता दें कि ईडी ने मंत्री के पीएस रहे संजीव के सहायक जहांगीर के घर से कई अहम दस्तावेज भी जब्त किए हैं।

इन दस्तावेजों को लेकर भी ईडी पूछताछ कर रही है। इडी की रिमांड में चल रहे मंत्री आलमगीर आलम के पीएस संजीव लाल ने भी जांच एजेंसी को कई अहम जानकारी दी है।

ईडी ने मंत्री और उनके पीएस दोनों को आमने सामने बिठाकर पूछताछ की है। संजीव ने स्वीकार किया है कि जो रुपए उनके और उनके सहायक के यहां से बरामद हुए हैं, वह सभी पैसे टेंडर कमीशन के हैं।

यह भी बताया है कि टेंडर कमीशन के नाम पर किन-किन लोगों से रुपए लिए गए।

महज 10 हजार से 40 करोड़ तक पहुंचा मामलाः

ग्रामीण कार्य विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम की गिरफ्तारी के बाद से ही मंत्री आलमगीर आलम ED की रडार में थे।

वीरेंद्र राम को ED ने 23 फरवरी 2023 को गिरफ्तार किया था। ईडी की ये पूरी कार्रवाई दस हजार रुपए घूस से जुड़ी है।

13 नवंबर 2019 को एसीबी ने जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा को एक ठेकेदार से 10 हजार रुपए रिश्वत लेते पकड़ा था।

सुरेश प्रसाद वर्मा ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम का करीबी है।

जिस वक्त सुरेश प्रसाद वर्मा को पकड़ा गया, उस दौरान वे जमशेदपुर में वीरेंद्र राम के मकान में रहता था।

एसीबी ने जब सुरेश वर्मा के ठिकानों पर छापेमारी की, तब घर से 2.67 करोड़ रुपए से अधिक बरामद किए गए थे।

उस समय सुरेश प्रसाद वर्मा ने बताया कि पैसे वीरेंद्र राम के हैं और उनके रिश्तेदार ने रखने को दिया था।

इस मामले में सुरेश प्रसाद वर्मा को जेल भेज दिया गया। एसीबी ने तब जांच का दायरा बढ़ाया, तो वीरेंद्र राम की करोड़ों की संपत्ति का खुलासा हुआ।

झारखंड के इस मुख्य अभियंता के ठिकानों से 30 लाख रुपए के अलावा 1.50 करोड़ रुपए जेवरात मिले थे।

इसके अलावा ईडी को उनके 100 करोड़ रुपए से अधिक की चल-अचल संपत्ति का भी पता चला था। आज उस 10 हजार रुपये की रिश्वत ने मंत्री तक को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।

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