दयानंद राय
वर्ष 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले आजसू पार्टी ने बड़ी चाल चली है। उसने आजसू पार्टी को युवाओं की पार्टी बनाने का लक्ष्य रखा है। पार्टी ने निर्णय लिया है कि उसकी केंद्रीय समिति में 50 प्रतिशत सदस्य युवा होंगे। उनकी उम्र 40 वर्ष से कम होगी। वहीं, समिति में 30 प्रतिशत महिला पदाधिकारी होंगी। यही नहीं सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राज्य की आबादी के आधार पर केंद्रीय समिति में पदाधिकारियों को स्थान दिया जाएगा। राज्य के सभी प्रखंड और नगर निकाय से पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम करने वाले कम से कम एक महिला और पुरुष केंद्रीय समिति में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे। यही नहीं पार्टी ने तीन महीने के अंदर एक लाख सक्रिय सदस्यों को पार्टी से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। जाहिर है कि पार्टी में बदलाव लाने की यह सोची-समझी कवायद है।
इसका सीधा कनेक्शन आनेवाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों से है। पार्टी की यह नयी कवायद आजसू बुद्धिजीवी मंच की उपज है। दरअसल सुदेश महतो जानते हैं कि चाहे संगठन का काम हो या फिर चुनावी बिसात। युवा अपना काम बखूबी और ऊर्जा के साथ करते हैं। क्योंकि युवा का मतलब ही एनर्जी का स्पार्क होता है। अब रही बात महिलाओं की तो महिलाएं अपना काम अपेक्षाकृत जिम्मेवारी से करने के लिए जानी जाती हैं। महिलाओं को अधिक से अधिक पार्टी से जोड़कर आजसू अपना वोट बैंक मजबूत करना चाहती है।
पार्टी में परिवर्तन की इस बयार पर आजसू के केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत कहते हैं कि आजसू पार्टी युवाओं की पार्टी है और युवा ही बदलाव के वाहक हैं। उनमें समाज में बदलाव लाने की क्षमता है। यही कारण है कि युवाओं पर पार्टी का फोकस है। वहीं महिलाओं को राजनीति में आगे लाने के लिए आजसू पार्टी शुरू से ही काम करती रही है।
हम चाहते हैं कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़े। हमने यह तय किया है कि आबादी के अनुरुप हम राजनीति में सभी जातियों और वर्गों को भागीदारी देंगे। झारखंड में मूल रूप से तीन किस्म के लोग हैं। एक आदिवासी हैं, दूसरा मूलवासी है और तीसरा प्रवासी है। हम सभी को पार्टी में न सिर्फ जगह देंगे बल्कि अपनी काबिलियत साबित करने का अवसर भी देंगे। पार्टी में तीन महीने के अंदर एक लाख सक्रिय सदस्य होंगे। ये पार्टी के पदेन सदस्य होंगे। ये वो लोग होंगे जिनमें नेतृत्व क्षमता होगी और जो पार्टी का नेतृत्व करेंगे।
अब समझते हैं कि आजसू की इस रणनीति का आनेवाले चुनावों में क्या असर दिखेगा। ये साफ है कि यदि आजसू इन बदलावों को कर पाती है तो इसका आनेवाले चुनावों के नतीजों पर साफ असर दिखेगा। सबसे बड़ा बदलाव तो ये होगा कि महिलाओं की एक बड़ी आबादी आजसू पार्टी से जुड़ेगी। चूंकि महिलाएं आजसू में बड़ी भूमिका में होंगी तो वोट के लिहाज से भी पार्टी को बड़ा माइलेज मिलेगा। राजनीति के जानकारों का कहना है कि आजसू अपने नीति निर्धारण में बड़ी सजगता से और फोकस होकर काम करती है।
युवा अगर अधिक से अधिक संख्या में पार्टी से जुड़ेंगे तो जाहिर है कि पार्टी में युवाओं की संख्या बढ़ेगी। जब युवाओं को आजसू में अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा तो वे पूरी ताकत से पार्टी के लिए काम करेंगे। महिलाएं भी इसी तरह अवसर मिलने पर अपनी काबिलियत दिखायेंगी। आबादी के अनुसार संगठन में लोगों को भागीदारी देने के मामले में आजसू भाजपा के सूत्रवाक्य सबका साथ सबका विकास का अनुसरण कर रही है। आजसू पार्टी की इस कवायद का असर क्या होगा यह तो झारखंड के मतदाता तय करेंगे लेकिन इतना तो साफ हो ही गया है कि पार्टी सबको संगठन से जोड़ने के लिए इन प्रयासों से फेविकॉल का मजबूत जोड़ लगाने में जुट गयी है।








