Vinay Chaubey:
रांची। शराब घोटाले के आरोपी विनय चौबे को बेल तो मिल गई है, लेकिन जिस वजह से बेल मिली है, उस पर सवाल उठने लगे हैं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शराब घोटाला को लेकर एक बार फिर राज्य सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि तकरीबन 1000 करोड़ रुपये के शराब घोटाला मामले में हेमंत सोरेन के पूर्व सचिव के खिलाफ एसीबी ने जानबूझकर 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की, जिससे उनकी जमानत का रास्ता आसान हो गया।
ईडी की जांच प्रभावित करने व सबूतों मिटाने की साजिशः
बाबूलाल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अपने ही पूर्व सचिव की गिरफ्तारी का षड्यंत्र इसलिए रचा था, ताकि ईडी की जांच प्रभावित हो सके और सबूतों को मिटाया जा सके। उन्होंने ईडी से आग्रह किया कि जनता के हजारों करोड़ की लूट में शामिल इन भ्रष्टाचारियों पर कठोर और विधिसम्मत कार्रवाई करें।
मोबाइल नंबर नहीं बदल सकेंगेः
झारखंड शराब घोटाला मामले में जेल में बंद वरीय आईएएस अधिकारी विनय चौबे को एसीबी कोर्ट ने BNSS की धारा 187 (2) के तहत जमानत दी है।
कोर्ट ने इस शर्त पर विनय चौबे को जमानत दी है कि बेल पर रहने के दौरान उन्हें राज्य से बाहर जाने से पहले कोर्ट को सूचना देनी होगी। साथ ही ट्रायल के दौरान वे अपना मोबाइल नंबर भी नहीं बदल सकते हैं।
90 दिनों में एसीबी ने नहीं की चार्जशीटः
विनय चौबे को गिरफ्तार करने के 92 दिनों बाद भी ACB ने अब तक आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दायर नहीं की है, जिसकी वजह से उन्हें जमानत मिल गई है। एसीबी द्वारा समय पर चार्जशीट नहीं किये जाने को विपक्ष सोची समझी साजिश बता रहा है।
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