रांची। बिहार में एनडीए ने किला फतह कर लिया है। विपक्षी एकता की नींव रखने वाले नीतीश के अब एनडीए का झंडा बुलंद कर रहे हैं। 2024 के चुनाव में वह एनडीए की नैया पार लगायेंगे। इसके साथ ही विपक्षी गठबंधन इंडी अलायंस के बाकी दलों के बिखरने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
आम आदमी पार्टी और टीएमसी पहले ही किनारा करते दिख रहे हैं। मायावती ने भी एकला चलो की राह पकड़ ली है। इस बीच झारखंड में भी बदलाव की बयार की आहट सुनाई देने लगी है। यहां भी बिहार की तरह ही कुछ हो जाये, तो आश्चर्य नहीं होगा।
झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार पर बनने के बाद से ही खतरे के बादल मंडराते रहे हैं। कांग्रेस के विधायकों के पाला बदल की अटकलें पहले से लगती रही हैं। बिहार की तरह ही झारखंड में जेएमएम के नेतृत्व में कांग्रेस और आरजेडी के गठबंधन की सरकार है।
81 सदस्यों वाली विधानसभा में जेएमएम को 47 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इनमें 30 विधायक अकेले जेएमएम के हैं। कांग्रेस के 16 विधायक हैं। बीजेपी पिछले चुनाव में 25 सीटें ही जीत पाई थी। उसके साथ आजसू पार्टी है, जिसके दो वधायक हैं।
कई बार कांग्रेस विधायकों के टूटने की खबर आई। कोलकाता में कांग्रेस के तीन विधायक जब 49 लाख रुपये के साथ पकड़े गए तो कहा यही गया कि सरकार को हटाने के लिए बीजेपी की ओर से उन्हें प्रलोभन दिया गया था।
यानी झारखंड में बीजेपी के निशाने पर कांग्रेस के विधायक पहले से ही रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और झारखंड के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के बयान से तो यही लगता है कि कांग्रेस के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं है।
रामेश्वर उरांव ने एक समारोह में पिछले रविवार को पूर्व सीएम और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की जिस तरह तारीफ की, उससे तो कुछ ऐसे ही संकेत मिल रहे हैं। उस कार्यक्रम में बाबूलाल मरांडी भी मौजूद थे।
रामेश्वर उरांव ने कहा कि झारखंड अलग राज्य का उद्देश्य शोषण से मुक्ति था। झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के समय से विकास का काम शुरू हुआ। उनके कार्यकाल की खासियत रही कि शासन, प्रशासन और सरकार में बेईमानी नहीं के बराबर थी।
वर्तमान समय में झारखंड आगे बढ़ता दिख रहा है। हालांकि विकास उतना नहीं हो पाया है, जितना होना चाहिए था। झारखंड को बचाना है तो यहां के आदिवासियों और मूल वासियों को बचाना होगा।
इधर बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे रामेश्वर उरांव की प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं। उन्होंने रामेश्वर उरांव के बयान के लिए उनकी सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘X’ पर लिखा कि झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने आज नैतिक साहस दिखाया।
उन्होंने बीजेपी सरकार एवं पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को सबसे ईमानदार बताया। रामेश्वर जी अब डूबते जहाज़ कांग्रेस को छोड़ने का सही समय है। हेमंत सोरेन जी की भ्रष्टाचारी सरकार को गिराकर आम जनता को राहत दीजिए।
पहले भी ऐसी खबरे आईं थी कि रामेश्वर उरांव इस सरकार में बहुत खुश नहीं हैं। खास तौर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाये जाने के बाद से ही उनकी खामोशी कुछ न कुछ कहती रही। चर्चा तो यह भी थी कि कांग्रेस के नाराज विधायक भी उनके संपर्क में थे।
इधर, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन जमीन घोटाले में ईडी के रडार पर हैं। उन्हें ईडी ने पूछताछ के लिए 10वीं बार समन जारी किया है। उनके दिल्ली स्थित आवास पर ईडी की टीम ने सोमवार को छापेमारी भी की। पर इडी को सीएम नहीं मिले।
इसके बाद से ही ईडी उनकी तलाश में है। ऐसा शायद ही देखने और सुनने को मिला हो कि किसी राज्य के मुख्यमंत्री की तलाश इस तरह से की जा रही हो और वह लापता हो। हेमंत सोरेन रविवार को चार्टर्ड प्लेन से अचानक दिल्ली चले गए थे।
10वी बार समन जारी करते हुए ईडी ने उनसे जानना चाहा था कि जमीन घोटाले की अधूरी जांच को पूरी करने के लिए के लिए 29 से 31 जनवरी के बीच वे कहां उपलब्ध होंगे। वे खुद ईडी दफ्तर आएंगे या ईडी की टीम उनके घर पूछताछ करने पहुंचे।
इस बीच मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से ईडी को सूचित किया गया है कि मुख्यमंत्री 31 जनवरी को दिन के एक बजे बयान दर्ज कराने के लिए उपलब्ध रहेंगे। इन सब बातों को लेकर झारखंड में हलचल बढ़ी हुई है। कई तरह के कयास लगाये जा रहे हैं।
झारखंड में सीएम आवास से लेकर राजभवन और अन्य केंद्रीय कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता दो दिनों से सड़क पर उतर कर केंद्र सरकार और ईडी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। परिस्थिति ऐसी बन गई मानो कुछ बड़ा होनेवाला है।
देखा जाये, तो पूरी हिंदी पट्टी पर भाजपा का कब्ज हो गया है सिर्फ झारखंड को छोड़ कर। ऐसे में 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले बीजेपी चाहेगी कि झारखंड में भी किसी तरह एनडीए का शासन हो जाये। और मौजूदा परिस्थिति बीजेपी का राह आसान कर सकती हैं।
उधर जेएमएम में भी लोबिन हेंब्रम जैसे कद्दावर नेता अपनी ही सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर सुर्खियों में हैं। बीजेपी ऐसे ही कुछ झामुमो नेताओं पर नजर गड़ाये हुए है।
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