RIMS encroachment Jharkhand: रिम्स अतिक्रमण के दोषी बिल्डरों-अफसरों के खिलाफ एसीबी जांच शुरू

Anjali Kumari
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RIMS encroachment Jharkhand

रांची। रिम्स यानी राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान की अधिग्रहित जमीन पर हुए अतिक्रमण और अवैध निर्माण मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। झारखंड हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एसीबी ने रिम्स प्रबंधन, राजस्व कार्यालय रांची, रांची नगर निगम, निबंधन कार्यालय रांची, रेरा, आरआरडीए के पदाधिकारियों और कर्मियों सहित अन्य अज्ञात के विरुद्ध धोखाधड़ी-फर्जीवाड़ा सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है।

दोषियों के जुर्माना वसूल कर प्रभावितों को मुआवजा देने का निर्देश

हाईकोर्ट ने 22 दिसंबर को इस मामले में आदेश देते हुए एसीबी को केस दर्ज कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि रिम्स की कब्जे वाली जमीन से अतिक्रमण हटाया जाए। साथ ही जिन लोगों के घर तोड़े जा रहे हैं, उन्हें मुआवजा दिया जाए। लेकिन, यह राशि दोषी अधिकारियों और बिल्डरों से वसूली जाए। इस आलोक में अब एसीबी ने छानबीन शुरू कर दी है।

9.65 एकड़ जमीन पर था अतिक्रमण

राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया था कि मोरहाबादी और कोकर मौजा में रिम्स की करीब 9.65 एकड़ अधिग्रहित जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया। जमीन पर कच्चे-पक्के मकान, बहुमंजिला अपार्टमेंट, दुकानें, पार्क, मंदिर और बाजार तक बना दिए गए। यह जमीन वर्ष 1964-65 में रिम्स के विस्तार और सार्वजनिक उपयोग के लिए अधिग्रहित की गई थी। बाद में दस्तावेजों में हेराफेरी कर इसे निजी प्लॉट की तरह बेच दिया गया।
इस मामले में रिम्स प्रबंधन, राजस्व कार्यालय रांची, नगर निगम, निबंधन कार्यालय, रेरा और आरआरडीए के पदाधिकारियों व कर्मियों सहित अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

ये अधिकारी एसीबी की राडार पर

  1. तत्कालीन रिम्स निदेशक : रिम्स की अधिग्रहित जमीन पर कब्जा और अवैध भवन निर्माण जिन-जिन कार्यकाल में हुआ, उस दौरान पदस्थापित रहे तत्कालीन रिम्स निदेशक एसीबी की जांच के दायरे में आएंगे। जांच में यह बिंदु प्रमुख है कि वर्ष 1964-65 में अधिग्रहित जमीन का अब तक म्यूटेशन क्यों नहीं कराया गया और डीआईजी ग्राउंड व आसपास की जमीन पर संस्थान ने भौतिक कब्जा क्यों नहीं लिया।
  2. तत्कालीन उप नगर आयुक्त: 10 दिसंबर 2020 को रांची नगर निगम की ओर से उक्त जमीन पर मुन्नी कुमारी और सुमित्रा कुमारी बड़ाईक के नाम पर होल्डिंग नंबर जारी किया गया। उस समय पदस्थापित रहे तत्कालीन उप नगर आयुक्त ने यह सत्यापन नहीं कराया कि जिस जमीन पर होल्डिंग दिया जा रहा है, वह अधिग्रहित सरकारी भूमि है या नहीं। यह मामला भी जांच के दायरे में है।
  3. तत्कालीन रजिस्ट्रार : रिम्स की जमीन के खाता संख्या 107, प्लॉट संख्या 1693 की 93 डिसमिल में से 11 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री मुन्नी कुमारी के नाम पर की गई। प्लॉट संख्या 1693 बी की 11.35 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री 27 अगस्त 2019 को सुमित्रा कुमारी बड़ाईक के नाम पर हुई। इन रजिस्ट्रियों के समय तत्कालीन रजिस्ट्रार भी जांच के दायरे में शामिल होंगे।
  4. तत्कालीन टाउन प्लानर : रांची नगर निगम ने 4 जनवरी 2021 को रिम्स की कब्जे वाली जमीन पर बने आनंदम अपार्टमेंट का नक्शा पास किया। उस समय तत्कालीन टाउन प्लानर श्रीकांत शरण थे। उन्होंने साइट विजिट की। लेकिन, जमीन किसकी है, उसके स्वामित्व की जांच नहीं की गई। जिसे एसीबी जांच के लिए अहम बिंदु माना गया है।
  5. तत्कालीन बड़गाई सीओ : बड़गाई अंचल के तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) शैलेश कुमार ने डीसीएलआर के निर्देश के बाद जमीन का म्यूटेशन किया। अंचल कार्यालय में उपलब्ध रिकॉर्ड के बावजूद जमीन के अधिग्रहित होने पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई। इसी आधार पर सीओ की भूमिका की जांच की जा रही है।
  6. तत्कालीन नगर आयुक्त : जिस अवधि में अवैध कब्जे वाली जमीन पर अपार्टमेंट का निर्माण हुआ, उस दौरान तत्कालीन नगर आयुक्त मुकेश कुमार पदस्थापित थे। उनके स्तर से भी नक्शा स्वीकृत किया गया। अवैध कब्जे और अधिग्रहित भूमि से जुड़े तथ्यों की जांच नहीं होने को लेकर एसीबी इस भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

भूमिका संदिग्ध मिली तो आय से अधिक संपत्ति की जांच होगी

एसीबी जांच के अगले चरण में निबंधन, म्यूटेशन और भवन निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की क्रमवार जांच करेगा। जिन अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामलों में अलग से जांच शुरू हो सकती है। इस प्राथमिकी के साथ ही रिम्स जमीन अतिक्रमण मामला अब विस्तृत जांच के दायरे में आ गया है। जांच के दौरान विभिन्न विभागों की भूमिका और जमीन से जुड़े लाभार्थियों की भी पड़ताल की जाएगी।

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