Abua Medicines:
रांची। झारखंड में अब अबुआ दवाखाना खुलने जा रहा है। राज्य के 24 जिलों में कुल 745 अबुआ दवाखाना खुलेंगें, जहां लोगों में मुफ्त में दवाएं मिलेंगी। राज्य की हेमंत सरकार करीब चार करोड़ की आबादी को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए यह योजना लेकर आ रही है।
एकीकृत मॉडल लागू होगाः
ये दवाखाने राज्य के 745 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (आयुष) में खोले जायेंगे। राज्य में पहली बार एकीकृत मॉडल लागू करते हुए एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्धा पद्धति की दवाएं एक ही स्थान पर मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी।
अलग-अलग दवाखाना से मरीजों को परेशानीः
अभी एलोपैथी और आयुष दवाओं के लिए अलग-अलग वितरण केंद्र हैं। इसके कारण मरीजों को कई बार दवा उपलब्धता में परेशानी होती है और सही पद्धति चुनने में भी समस्या आती है। नया मॉडल मरीजों को एक ही केंद्र पर सभी विकल्प उपलब्ध कराएगा, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इलाज की प्रक्रिया सरल होगी। अबुआ दवाखाना को राज्य स्तर पर तैयार किए गए मॉडल फार्मेसी आउटलेट के अनुरूप डिजाइन किया जाएगा। दवा आपूर्ति और वितरण प्रणाली तकनीक आधारित, पारदर्शी और उत्तरदायी होगी, ताकि किसी भी स्तर पर उपलब्धता की समस्या न रहे।
राज्य, जिला और प्रखंड स्तर पर बनेगी निगरानी समितिः
योजना के सुचारू संचालन के लिए आयुष निदेशालय को नोडल कार्यालय बनाया जाएगा। निदेशक आयुष की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय संचालन समिति गठित होगी, जो समीक्षा और सुधारात्मक कदमों का निरीक्षण करेगी। जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति बनेगी। इसमें सिविल सर्जन सदस्य और जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी सदस्य सचिव होंगे। यह समिति स्थानीय जरूरतों के आधार पर दवाओं की सूची भी तैयार करेगी। प्रखंड स्तर पर बीडीओ की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी, जिसमें चिकित्सा पदाधिकारी और संबंधित सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) सदस्य होंगे। ये समितियां दवाखानों के नियमित निरीक्षण, प्रबंधन और रिपोर्टिंग का काम करेंगी।
डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए बनेगी पीएमयूः
दवाइयों की उपलब्धता और आपूर्ति की समीक्षा प्रखंड स्तर पर हर महीने और जिला स्तर पर हर तीन महीने होगी। डिजिटलीकरण और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए आयुष निदेशालय में एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) का गठन किया जाएगा। पीएमयू में प्रोजेक्ट मैनेजर, आईटी मैनेजर और फार्मासिस्ट नियुक्त होंगे, जो सॉफ्टवेयर, पोर्टल, मोबाइल एप्लिकेशन और क्लाउड आधारित प्रणाली को संभालेंगे। अबुआ दवाखाना का संचालन आयुष चिकित्सक या सीएचओ के देखरेख में होगा।
रख-रखाव के लिए हर माह मिलेंगे 1 लाखः
योजना की एकमुश्त लागत 37.35 करोड़ रुपए अनुमानित है, जबकि प्रतिवर्ष 7.45 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च आएगा। संचालन, इंटरनेट, रजिस्टर और अन्य व्यय के लिए प्रत्येक दवाखाना को एक लाख रुपये प्रतिमाह उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी दवाखानों के संचालन के लिए अलग से बैंक खाता खोला जाएगा।
वहीं, आयुष्मान आरोग्य मंदिर में कार्यरत योग प्रशिक्षक को दवाखाना संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके बदले उन्हें हर महीने 3,000 रुपए प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
ग्रामीण इलाकों में दवा उपलब्धता बड़ी चुनौतीः
राज्य में 3958 स्वास्थ्य उपकेंद्र, 3973 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 330 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 188 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 24 सदर अस्पताल मौजूद हैं। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां 76 प्रतिशत आबादी रहती है, एलोपैथी और आयुष दवाओं की उपलब्धता अब भी चुनौती बनी हुई है। अधिकांश ग्रामीण जनसंख्या अनुसूचित जनजाति समुदाय की है, जिनमें आयुष पद्धतियों की गहरी जड़ें हैं। सरकार का मानना है कि अबुआ दवाखाना मॉडल इस अंतर को पाटेगा और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देगा।
